महाराष्ट्र के संभाजीनगर में पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने एक अत्यंत सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है। 90 के दशक के कथित अंडरवर्ल्ड डॉन बाबा फरजान के पडेगांव स्थित आलीशान बंगले पर पुलिस ने बड़ी छापेमारी की है। इस गुप्त ठिकाने से भारी मात्रा में नकदी, हथियार और कीमती सामान बरामद हुआ है, जिसे देखकर जांच अधिकारियों की भी आंखें फटी की फटी रह गईं। करीब एक महीने पहले दम तोड़ चुके इस डॉन के ठिकाने पर की गई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
छापेमारी में मिला कुबेर का खजाना और हथियारों का जखीरा
पुलिस को मुखबिरों से मिली पक्की सूचना के बाद शुक्रवार तड़के यह बड़ी कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे पडेगांव इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और बंगले के आसपास कड़ा सुरक्षा घेरा बना दिया गया था।
जांच एजेंसियों को इस आलीशान बंगले की गहन तलाशी के दौरान जो चीजें मिली हैं, वे हैरान करने वाली हैं। बरामद की गई संपत्ति और हथियारों की सूची इस प्रकार है:
- करीब ₹5 करोड़ की भारी-भरकम नकद राशि।
- लगभग ₹21 लाख मूल्य के सोने के आभूषण।
- करीब ₹8 लाख की चांदी।
- चार राइफलें और 500 जिंदा कारतूस।
- तलवारें, चाकू और कई अन्य धारदार हथियार।
इसके अलावा, पुलिस ने मौके से वित्तीय लेन-देन और संपत्ति से जुड़े कई अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं। सूत्रों के अनुसार, बंगले से इतनी अधिक नकदी मिली थी कि उसे हाथ से गिनना असंभव था। इसके लिए पुलिस को मौके पर ही नोट गिनने की मशीनें मंगवानी पड़ीं। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद अधिकारियों ने इस तलाशी अभियान को पूरा किया और नकदी की गिनती की।
मौत के बाद हुई कार्रवाई ने खड़े किए कई सवाल
कथित अंडरवर्ल्ड डॉन बाबा फरजान का निधन हो चुका है। जहां कुछ रिपोर्ट्स में उनके करीब एक महीने पहले दम तोड़ने की बात कही गई है, वहीं कुछ अन्य जानकारियों के अनुसार लंबी बीमारी के कारण करीब छह महीने पहले उनकी मौत हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद हुई इस बड़ी छापेमारी की कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही हैं कि बाबा फरजान का पुराना आपराधिक नेटवर्क क्या अब भी सक्रिय था? क्या उनकी मौत के बाद भी उनके अवैध धंधे और वित्तीय लेन-देन का काम उनके करीबियों द्वारा संचालित किया जा रहा था? जांच दल अब इन सभी कड़ियों को आपस में जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
जानिए कौन था डॉन बाबा फरजान?
1990 के दशक में छत्रपति संभाजीनगर (जिसे पहले औरंगाबाद के नाम से जाना जाता था) और उसके आस-पास के क्षेत्रों में बाबा फरजान का जबरदस्त खौफ और दबदबा हुआ करता था। उस दौर में शहर में होने वाले बड़े विवादों, जमीन के झगड़ों को सुलझाने और जबरन वसूली के मामलों में बाबा फरजान का नाम प्रमुखता से सामने आता था।
मूल रूप से शहर के रोहिला गली क्षेत्र का रहने वाला बाबा फरजान 1980 और 1990 के दशक में लेबर यूनियन के अध्यक्ष (प्रेसिडेंट) के रूप में भी सक्रिय रहा था। बाबा फरजान के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में कई गंभीर मामले दर्ज थे, जिनमें प्रमुख रूप से:
- दंगा भड़काने और अशांति फैलाने के आरोप।
- मारपीट और जानलेवा हमला करने के मामले।
- हत्या का प्रयास और जबरन अपहरण करने जैसे गंभीर अपराध।
हालांकि, जैसे-जैसे समय बीतता गया, बढ़ती उम्र और लगातार खराब सेहत के कारण बाबा फरजान का अपने आपराधिक नेटवर्क पर नियंत्रण काफी कमजोर हो गया था। पिछले कुछ वर्षों में वह पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुका था और लंबी बीमारी से जूझ रहा था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। अब पुलिस उसके पीछे छूटे इस बेनामी साम्राज्य की पूरी कुंडली खंगालने में जुटी हुई है।
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