रांची के जंगलों का जादुई पौधा
झारखंड में रांची के आसपास के घने जंगलों में एक ऐसा पौधा बहुतायत में पाया जाता है, जो स्थानीय लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वभाव है। जैसे ही आप इस पौधे की पत्तियों को छूते हैं, वे तुरंत मुरझा जाती हैं। हालांकि, कुछ समय बीतने के बाद ये पत्तियां वापस अपनी सामान्य स्थिति में आ जाती हैं। इसी अनूठी खूबी के कारण इसे छुईमुई के नाम से जाना जाता है और लोग इसे बड़े चाव से देखते हैं।
स्वास्थ्य के लिए औषधि का काम
स्थानीय निवासी सुजीत बताते हैं कि छुईमुई का पौधा केवल दिखने में ही निराला नहीं है, बल्कि इसके औषधीय गुण इसे बेहद खास बनाते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह पौधा पेट संबंधी परेशानियों और चर्म रोगों के उपचार में एक रामबाण की तरह काम करता है। सुजीत के अनुसार, यह घाव को जल्दी भरने में भी बहुत प्रभावी साबित होता है।
पेट दर्द और डायरिया में रामबाण
ग्रामीण पारंपरिक तरीके से इस पौधे का इस्तेमाल करते हैं। सुजीत का कहना है कि वे इस पौधे की पत्तियों को तोड़कर इसका काढ़ा तैयार करते हैं। यदि किसी व्यक्ति को डायरिया की समस्या है, पेट में तेज दर्द हो रहा है, या फिर गैस और अपच जैसी शिकायतें हैं, तो उन्हें बस दो चम्मच इस काढ़े का सेवन करना होता है। इसके नियमित या जरूरत के अनुसार सेवन से पेट की कई तरह की तकलीफें जड़ से खत्म हो जाती हैं।
त्वचा के रोगों का भी है इलाज
पेट के अलावा यह पौधा स्किन से जुड़ी समस्याओं में भी बहुत कारगर माना जाता है। सुजीत बताते हैं कि त्वचा पर होने वाले दाग-धब्बे और खुजली जैसे रोगों से मुक्ति पाने के लिए इसकी पत्तियों का पेस्ट तैयार किया जाता है। प्रभावित स्थान पर इस लेप को रगड़ने से धीरे-धीरे चर्म रोग की समस्या खत्म होने लगती है। इसका इस्तेमाल कुछ बार करने से ही सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं, इसीलिए स्थानीय लोग इसे एक प्रभावी प्राकृतिक औषधि मानते हैं।
पर्यटन और आकर्षण का केंद्र
छुईमुई के पौधे की जादुई प्रवृत्ति इसे लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनाती है। कई बार बाहर से आने वाले पर्यटक खासतौर पर इस पौधे को देखने के लिए आते हैं। लोग जब इसकी पत्तियों को छूकर उन्हें मुरझाते हुए देखते हैं, तो उन्हें बहुत आनंद आता है। लोग अक्सर इस अद्भुत नजारे का वीडियो भी बनाते हैं।
खूंटी तक फैली है इस पौधे की पहचान
सुजीत बताते हैं कि यह पौधा मुख्य रूप से रांची के आसपास के क्षेत्रों और खूंटी के जंगलों में बड़ी संख्या में मौजूद है। स्थानीय लोग इस पौधे की अहमियत को बखूबी समझते हैं और इसका इस्तेमाल जैविक खाद बनाने के लिए भी करते हैं। यह एक छोटा सा पौधा है, लेकिन इसके फायदे अनेक हैं। दूर-दूर से लोग हमसे इस पौधे के बारे में पूछते हैं और इसके स्थान के बारे में जानकारी लेते हैं, जिससे यह क्षेत्र के लिए आकर्षण का एक बड़ा केंद्र बन गया है।
https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/health-the-touch-me-not-plant-is-a-sure-fire-remedy-for-diarrhea-and-skin-diseases-chui-mui-plant-benefits-local18-10640598.html