समस्तीपुर में अनोखी खेती का कमाल
बिहार का समस्तीपुर जिला अब केवल पारंपरिक फसलों और सब्जियों के उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि नए तरह के बागवानी प्रयोगों के लिए भी चर्चा में है। जिले के नंदनी गांव निवासी और पर्यावरण के प्रति समर्पित संजीत ठाकुर ने अपने बगीचे में ब्लैक डायमंड किस्म के काले अमरूद की सफल खेती कर सबको हैरान कर दिया है। यह फल अपनी बनावट और स्वाद के कारण न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी एक नई मिसाल बनकर उभरा है।
बाहर काला और अंदर गुलाबी
पहली नजर में इस अमरूद को देखकर कोई भी चकित हो सकता है, क्योंकि इसका बाहरी छिलका गहरे काले रंग का होता है। सामान्य हरे अमरूद से बिल्कुल अलग दिखने वाला यह फल देखने में किसी आकर्षक रत्न जैसा लगता है। हालांकि, इसकी असली खूबसूरती इसे काटने के बाद सामने आती है। जब इस अमरूद को काटा जाता है, तो इसके अंदर का गूदा गहरा गुलाबी या लाल रंग का नजर आता है, जो इसे बाजार में मिलने वाले अन्य फलों से अलग और खास बनाता है। इसकी मिठास इतनी अद्भुत है कि लोग इसे खाने के बाद मिठाई तक को भूल रहे हैं।
जलवायु के अनुकूल है खेती
संजीत ठाकुर, जो लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण और नए पौधों के रोपण के कार्यों में जुटे हैं, का कहना है कि यह प्रयोग उन्होंने अपनी रुचि के कारण शुरू किया था। उन्होंने पाया कि समस्तीपुर की मिट्टी और यहां की जलवायु ब्लैक डायमंड किस्म के अमरूद के लिए बेहद उपयुक्त है। उनके बगीचे में लगे पौधों में न केवल शानदार फलन हुई है, बल्कि फलों की गुणवत्ता भी बहुत बेहतरीन है। संजीत बताते हैं कि इस किस्म की बागवानी करना काफी सुखद अनुभव रहा है और इसका उत्पादन भी उम्मीद से बेहतर मिल रहा है।
लोगों में बढ़ रही है दिलचस्पी
इस अनूठे अमरूद की खबर जैसे ही इलाके में फैली, इसे देखने और इसके स्वाद को परखने के लिए लोगों का तांता लग गया है। संजीत के बगीचे में अब न केवल स्थानीय लोग, बल्कि अन्य जगहों से भी किसान और बागवानी प्रेमी पहुंच रहे हैं। वे संजीत से इस अमरूद को उगाने की तकनीक और टिप्स भी ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इतना अनोखा अमरूद देखा है जो देखने में जितना रहस्यमयी है, स्वाद में उतना ही लाजवाब है।
किसानों के लिए नई राह
संजीत ठाकुर का मानना है कि खेती के पारंपरिक तौर-तरीकों के साथ अगर किसान बागवानी में नवाचार यानी नए प्रयोग करें, तो वे अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। उनका तर्क है कि बाजार में ऐसी खास किस्मों की भारी मांग है और अगर किसान सही जानकारी के साथ ऐसी फसलों को अपनाते हैं, तो उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है। संजीत की यह पहल समस्तीपुर के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है, जो अब लीक से हटकर खेती करने के बारे में विचार कर रहे हैं। संजीत ठाकुर का यह सफल प्रयोग साबित करता है कि लगन और नई सोच के साथ खेती को एक नई दिशा दी जा सकती है।
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