अमरनाथ यात्रा में टूटा चार दशकों का रिकॉर्ड: बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने के बाद भी श्रद्धालुओं का सैलाब, श्राइन बोर्ड ने जारी की सख्त एडवाइजरी

इस साल की अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के चलते बाबा बर्फानी का पवित्र शिवलिंग समय से पहले ही पिघल गया है। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करते हुए प्रशासन ने बिना पंजीकरण वाले यात्रियों के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं।

जम्मू-कश्मीर में चल रही पावन श्री अमरनाथ जी की यात्रा इस बार नया इतिहास रच रही है। इस वर्ष यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले चार दशकों के तमाम रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। हालांकि, इस भारी भीड़ और बदलते पर्यावरण के बीच एक बेहद निराशाजनक खबर भी सामने आई है। पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग यानी बाबा बर्फानी समय से पहले ही अंतर्ध्यान हो गए हैं। वैश्विक तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) के बढ़ते प्रभाव और श्रद्धालुओं की भारी आमद के कारण पवित्र शिवलिंग पूरी तरह से पिघल चुका है। इसके बावजूद, भक्तों की अटूट आस्था में कोई कमी नहीं आई है और वे बाबा के जयकारों के साथ लगातार गुफा की ओर बढ़ रहे हैं। प्राकृतिक शिवलिंग के लुप्त होने के बाद भी हजारों श्रद्धालु रोजाना पवित्र गुफा में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

समय से पहले पिघल गए बाबा बर्फानी

इस वर्ष की वार्षिक अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ 3 जुलाई को हुआ था। यात्रा शुरू होने के पहले हफ्ते में ही लगभग 1,00,000 श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। लेकिन इस बार केवल 5 दिनों के भीतर ही पवित्र बर्फ का शिवलिंग पूरी तरह से पिघल गया।

यह स्थिति पिछले वर्षों की तुलना में बेहद चिंताजनक है। अगर हम पिछले साल की बात करें, तो बाबा बर्फानी भक्तों को कम से कम 7 दिनों तक अपने भव्य शिवलिंग के रूप में दिखाई दिए थे। लेकिन इस बार यह अवधि सिमटकर महज पांच दिन रह गई। यात्रा से वापस लौट रहे श्रद्धालुओं के चेहरों पर निराशा साफ देखी जा सकती है। भक्तों का मानना है कि पवित्र गुफा के आसपास बढ़ रहा प्रदूषण, तीर्थयात्रियों की बेतहाशा भीड़, विशिष्ट लोगों (VIP) के प्रवेश की अव्यवस्था और ग्लोबल वार्मिंग का प्रतिकूल प्रभाव इस असमय पिघलाव का मुख्य कारण हैं। अब स्थिति यह है कि आने वाले दिनों में यात्रा पर जाने वाले भक्तों को पवित्र गुफा में हिम शिवलिंग के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं मिल सकेंगे, लेकिन उनकी धार्मिक आस्था उन्हें पवित्र स्थल तक लगातार खींच ला रही है।

श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित उछाल और चुनौतियां

इस साल अमरनाथ यात्रा को लेकर भक्तों में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए कश्मीर पहुंच रहे हैं। भीड़ का आलम यह है कि बड़ी संख्या में लोग बिना किसी पूर्व पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) के ही सीधे यात्रा बेस कैंपों में पहुंच रहे हैं। बिना पंजीकरण के आए लोग पंजीकरण काउंटरों पर घंटों लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं।

इस अनियंत्रित भीड़ के कारण उन श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने पहले से नियमानुसार पंजीकरण करवा रखा है और वे वहां अपने RFID कार्ड प्राप्त करने का इंतजार कर रहे हैं। इतनी विशाल भीड़ का सुचारू प्रबंधन करना अमरनाथ यात्रा से जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हो रहा है। अत्यधिक भीड़ के कारण पूरी मशीनरी को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो।

आंकड़ों की जुबानी: पिछले साल बनाम इस साल की स्थिति

प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस बार स्थिति कितनी संवेदनशील है। पिछले वर्ष यात्रा के शुरुआती चार दिनों के भीतर लगभग 55,000 तीर्थयात्रियों ने यात्रा की थी। इसके विपरीत, इस वर्ष शुरुआती चार दिनों में ही यह आंकड़ा बढ़कर 86,000 के पार पहुंच गया।

तीर्थयात्रियों की संख्या में इस भारी बढ़ोतरी ने श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और स्थानीय सुरक्षा बलों के सामने लॉजिस्टिक्स, रहने, खाने और सुरक्षा से जुड़ी व्यापक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है और अधिकारियों को चौबीसों घंटे पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन की ओर से सख्त एडवाइजरी

तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने एक विस्तृत दिशा-निर्देश (एडवाइजरी) जारी की है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) ने बिना पंजीकरण के पहुंचे यात्रियों से विशेष अपील की है कि वे धैर्य रखें और अपनी निर्धारित बारी का इंतजार करें।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यात्रा के दोनों मार्गों यानी चंदनवाड़ी और बालटाल से प्रतिदिन जाने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या पूरी तरह से पूर्व-निर्धारित है। इस तय सीमा को किसी भी परिस्थिति में बढ़ाया नहीं जा सकता है। इसलिए सभी को तय व्यवस्थाओं का पूरी तरह से पालन करना चाहिए।

"सभी विभागों के सरकारी अधिकारी, सुरक्षा बल और कर्मचारी तीर्थयात्रियों की सेवा और सुरक्षा में पूरी निष्ठा के साथ दिन-रात जुटे हुए हैं। मेरा श्रद्धालुओं से विनम्र निवेदन है कि यदि वे व्यवस्था का सम्मान करेंगे और अपनी बारी की प्रतीक्षा करेंगे, तो यह यात्रा सभी के लिए सुरक्षित, सुगम और सुखद बन सकेगी।"

बिना रजिस्ट्रेशन आ रहे यात्रियों को सख्त चेतावनी

प्रशासन ने अब उन लोगों के लिए सख्त रुख अपनाया है जो बिना वैध दस्तावेजों या बिना पूर्व पंजीकरण के सीधे यात्रा पर चले आ रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए प्रशासन की ओर से कड़ी चेतावनी और दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:

  • प्रत्येक श्रद्धालु को यात्रा के दौरान अपने पास वैध पंजीकरण दस्तावेज और पहचान पत्र रखना अनिवार्य है।
  • सुरक्षा बलों द्वारा तय किए गए सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए।
  • विभिन्न जांच चौकियों (चेकपॉइंट्स) पर तैनात सुरक्षा अधिकारियों और पुलिस बल के साथ पूर्ण सहयोग करें।
  • श्रद्धालु अपनी पंजीकरण पर्ची पर अंकित निर्धारित तारीख को ही बेस कैंप पर पहुंचें, उससे पहले या बाद में भीड़ बढ़ाने से बचें।

जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों के संभागीय आयुक्तों (डिवीजनल कमिश्नर) ने भी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे वैध पंजीकरण के बिना यात्रा की योजना न बनाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यात्रा को सुचारू, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद आवश्यक है। किसी भी तरह की अनावश्यक परेशानी या असुविधा से बचने के लिए आम जनता का प्रशासन को सहयोग करना अनिवार्य है। प्रशासन द्वारा इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और सरकारी वेबसाइटों पर लगातार जागरूकता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।

https://www.indiatv.in/jammu-and-kashmir/records-broken-during-this-year-amarnath-yatra-advisory-issued-for-pilgrims-2026-07-07-1229720