खरीफ सीजन में किसानों के लिए वरदान बना पावर वीडर, 8 से 10 मजदूरों का काम अब कुछ ही घंटों में

बालोद के गांधी किसान मॉल में उपलब्ध पावर वीडर मशीन धान और सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो रही है, जिससे समय और लागत दोनों की बचत हो रही है।

खेती में आधुनिक तकनीक की बढ़ती मांग

खरीफ का सीजन शुरू होते ही बालोद जिले के किसान अपने खेतों में धान की रोपाई और सब्जी की फसलों की तैयारी को लेकर व्यस्त हो गए हैं। इस दौर में खेती से जुड़े कामों जैसे कि जुताई, मताई, निंदाई और मेड़ तैयार करने के लिए आधुनिक यंत्रों की मांग में तेजी देखी जा रही है। इसी कड़ी में बालोद स्थित गांधी किसान मॉल के संचालक संजय गांधी ने किसानों को पावर वीडर के इस्तेमाल पर जोर दिया है। उन्होंने इसे छोटे और मझोले किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बताते हुए कहा कि यह मशीन किसी मिनी ट्रैक्टर से कम नहीं है और यह खेती की मेहनत और खर्च को काफी हद तक कम कर सकती है।

पावर वीडर के काम करने की क्षमता

संजय गांधी का कहना है कि धान की रोपाई से पहले खेत की जमीन को तैयार करना बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह मशीन ट्रैक्टर की तरह ही काम करती है और जमीन में लगभग 6 इंच तक गहरी जुताई करने में पूरी तरह सक्षम है। इसकी उपयोगिता के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि पावर वीडर से जुताई करने पर खेत की मिट्टी ट्रैक्टर की तुलना में कहीं अधिक भुरभुरी हो जाती है, जिससे बीजों का अंकुरण तेजी से होता है और फसल की ग्रोथ पर भी बेहतर असर पड़ता है। ट्रैक्टर से खेत में रह जाने वाले मिट्टी के बड़े ढेले इस मशीन से आसानी से बारीक हो जाते हैं, जिससे खेत की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है।

8 से 10 मजदूरों के बराबर काम

वर्तमान दौर में कृषि क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती मजदूरों की कमी और बढ़ती हुई मजदूरी दरें हैं। ऐसे में पावर वीडर किसानों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है क्योंकि यह अकेला यंत्र 8 से 10 अनुभवी मजदूरों के बराबर काम निपटा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, इस मशीन की मदद से केवल डेढ़ से दो घंटे के भीतर ही एक एकड़ खेत की जुताई या निंदाई का काम पूरा किया जा सकता है। इससे न केवल किसान का कीमती समय बचता है, बल्कि मजदूरी पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी काफी कम हो जाता है, जिससे खेती लाभ का सौदा बनती है।

सब्जी उत्पादकों के लिए भी है उपयोगी

यह पावर वीडर केवल धान की खेती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए भी यह बेहद कारगर साबित हो रहा है। सब्जी की खेती के दौरान मेड़ तैयार करना एक मेहनत वाला काम होता है, जिसे यह मशीन मिनटों में आसान बना देती है। साथ ही, मेड़ के आसपास उगने वाली खरपतवार को हटाने में भी यह काफी मददगार है। खरपतवार खत्म होने से फसल की देखभाल आसान हो जाती है और अंततः उत्पादन में वृद्धि देखने को मिलती है।

पेट्रोल और डीजल मॉडल के विकल्प

पावर वीडर को लेकर संजय गांधी ने जानकारी दी कि बाजार में यह मशीन पेट्रोल और डीजल दोनों ही मॉडल्स में मौजूद है। इसे चलाने के लिए किसी विशेष प्रकार के तकनीकी प्रशिक्षण की जरूरत नहीं होती है। इसकी सादगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे चलाने के लिए केवल एक व्यक्ति की आवश्यकता होती है। कई इलाकों में महिला किसान भी इस मशीन को पूरी कुशलता के साथ संचालित कर रही हैं। साथ ही इसे एक खेत से दूसरे खेत तक ले जाना भी बेहद सरल है, क्योंकि दो लोग मिलकर इसे आसानी से उठाकर या खींचकर कहीं भी ले जा सकते हैं।

लागत और उपलब्धता

मशीन की आर्थिक उपयोगिता पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि एक एकड़ खेत की जुताई करने में महज एक से सवा लीटर पेट्रोल की खपत होती है। इस तरह, कुल मिलाकर 200 से 250 रुपये के खर्च में पूरे एक एकड़ खेत की जुताई और मताई का काम संपन्न हो जाता है। बालोद के गांधी किसान मॉल में यह पावर वीडर 25 हजार से 50 हजार रुपये की कीमत सीमा के भीतर उपलब्ध कराया जा रहा है। कुल मिलाकर, खरीफ सीजन के दौरान कम बजट में बेहतर खेती करने के इच्छुक किसानों के लिए यह मशीन एक प्रभावी और टिकाऊ विकल्प बनकर उभरी है।

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