गोपालगंज में सर्पदंश से बढ़ते खतरे पर प्रशासन की चेतावनी
बिहार के गोपालगंज जिले में पिछले 72 घंटों के भीतर सांप के डसने से 3 बच्चों समेत कुल 6 लोगों की असामयिक मृत्यु ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। इन दर्दनाक घटनाओं के मद्देनजर जिला मजिस्ट्रेट समीर सौरभ ने सक्रियता दिखाते हुए सीधे सदर अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने वहां भर्ती सर्पदंश के पीड़ितों का हाल जाना और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इलाज की मौजूदा व्यवस्थाओं और मौतों के कारणों पर विस्तृत चर्चा की। जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया है कि सर्पदंश के मामलों में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए सही समय पर इलाज बहुत जरूरी है।
क्या है इलाज का गोल्डन पीरियड
जिला मजिस्ट्रेट समीर सौरभ ने आम जनता को सचेत करते हुए बताया कि सांप काटने के बाद के शुरुआती 4 घंटे चिकित्सा विज्ञान में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हें गोल्डन पीरियड कहा जाता है। यदि कोई व्यक्ति सांप के काटने के तुरंत बाद इस समय सीमा के भीतर किसी सरकारी अस्पताल पहुंच जाता है, तो उसकी जान बचने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे तंत्र-मंत्र या झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वासों में अपना कीमती समय बर्बाद न करें, क्योंकि ऐसे प्रयासों से जहर शरीर में और तेजी से फैल सकता है।
अस्पतालों में उपलब्ध है पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम
गोपालगंज के सिविल सर्जन डॉ. इजरायल और अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने जानकारी दी है कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम यानी एएसवी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही सर्पदंश के मरीजों के उपचार के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 72 घंटों में जहां 6 लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई है, वहीं समय पर अस्पताल पहुंचने वाले 50 से अधिक लोगों को सफल उपचार के बाद पूरी तरह बचा लिया गया है।
इलाज में तेजी लाने के लिए गोल्डन पीरियड के नियम
- सांप के काटने के बाद शुरुआती 1 से 3 घंटे का समय सबसे संवेदनशील होता है, इसे ही इलाज का गोल्डन पीरियड माना जाता है।
- पीड़ित जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचेगा, चिकित्सक उतनी ही प्रभावी तरीके से जहर का असर कम करने वाली दवाएं दे पाएंगे।
- समय पर ASV का इंजेक्शन मिलने से गंभीर शारीरिक जटिलताओं और मृत्यु का जोखिम बहुत कम हो जाता है।
सांप काटने के तुरंत बाद क्या करें
दुर्घटना की स्थिति में धैर्य न खोएं। मरीज को शांत रखना सबसे जरूरी है ताकि उसका हृदय गति सामान्य रहे। काटे गए अंग को जितना हो सके स्थिर रखें और हिलने-डुलने से बचें। शरीर पर मौजूद अंगूठी, कड़ा, घड़ी या तंग कपड़े तुरंत उतार दें क्योंकि जहर के असर से प्रभावित अंग में सूजन आ सकती है। पीड़ित को बिना किसी देरी के सीधे नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। यदि संभव हो, तो सांप की पहचान या उसके रंग को ध्यान में रखें, लेकिन उसे पकड़ने या मारने की कोशिश में अपना समय बर्बाद न करें।
इन गलतियों से हमेशा बचें
सांप काटने के बाद कई लोग घबराहट में गलत कदम उठा लेते हैं, जिनसे मरीज की जान को खतरा हो सकता है। घाव को कभी भी ब्लेड से न काटें और न ही उस पर चीरा लगाएं। मुंह से जहर चूसने का प्रयास करने की कोशिश बिल्कुल न करें। घाव के ऊपर रस्सी, कपड़े या रबर बैंड से बहुत कसकर न बांधें, क्योंकि इससे रक्त का प्रवाह रुकने से अंग खराब हो सकता है। इसके अलावा, बर्फ, मिट्टी, हल्दी, जड़ी-बूटी, तेल या किसी भी घरेलू लेप का प्रयोग न करें। सबसे मुख्य बात, किसी भी स्थिति में झाड़-फूंक या तांत्रिक उपचार पर निर्भर न रहें।
सर्पदंश के लक्षण और एहतियात
सांप के जहर के प्रभाव को पहचानने के लिए इन लक्षणों पर गौर करें: प्रभावित स्थान पर तेजी से सूजन और असहनीय दर्द होना, सांस लेने में तकलीफ, आवाज में बदलाव, पलकों का झुकना, धुंधला दिखाई देना, बोलने में लड़खड़ाहट, लगातार उल्टी आना, चक्कर आना या बेहोशी छाना, और मसूड़ों या पेशाब के जरिए खून आना। इलाज के दौरान केवल डॉक्टर द्वारा निर्देशित ASV और अन्य दवाएं ही लें। मरीज की नाड़ी, रक्तचाप और सांस की निरंतर निगरानी आवश्यक है। पूरी तरह स्वस्थ होने से पहले अस्पताल से घर न लौटें। भविष्य में खेत, जंगल या झाड़ियों वाले इलाकों में चलते समय जूतों और पूरी सुरक्षा वाले कपड़ों का उपयोग करना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
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