जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे। वहां पहुंचते ही उनका स्वागत बेहद खास अंदाज में किया गया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद हवाई अड्डे पर पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी की। इस दौरान जकार्ता के आसमान में भी नजारा अद्भुत था, जब इंडोनेशियाई वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने प्रधानमंत्री के विमान के साथ उड़ान भरते हुए उन्हें सुरक्षा घेरा प्रदान किया और उनका स्वागत किया। हवाई अड्डे पर चार वरिष्ठ मंत्रियों की मौजूदगी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन ने इस यात्रा को पहले ही दिन से बेहद खास बना दिया।
भारतीय समुदाय का जोश और सांस्कृतिक जुड़ाव
प्रधानमंत्री के ठहरने वाले होटल में भारतीय मूल के लोगों का भारी जमावड़ा देखने को मिला। वहां मौजूद लोग मोदी मोदी के नारों के साथ प्रधानमंत्री का अभिनंदन कर रहे थे। भारतीय समुदाय के इस प्रेम और आत्मीयता को देखकर प्रधानमंत्री भी गदगद दिखे और उन्होंने लोगों से मिलकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे राष्ट्रपति प्रबोवो द्वारा किए गए इस विशेष और गर्मजोशी भरे स्वागत से बेहद प्रभावित हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति के साथ होने वाली उनकी द्विपक्षीय बातचीत से भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते नई ऊंचाइयों को छुएंगे।
मंच पर जीवंत हुई भारत की प्राचीन परंपराएं
इंडोनेशियाई धरती पर भारतीय संस्कृति की गहरी छाप देखकर प्रधानमंत्री काफी उत्साहित नजर आए। वहां आयोजित कार्यक्रमों में उन्होंने सामन्वय ग्रुप द्वारा प्रस्तुत भरतनाट्यम नृत्य देखा। उन्होंने इस प्रदर्शन की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि यह देखना सुखद है कि भारत की पारंपरिक कलाओं को इंडोनेशिया जैसे देश में इतने जतन और सलीके के साथ जीवित रखा गया है। इसके अलावा, उन्होंने रामायण की कथा पर आधारित पारंपरिक शैडो पपेट्री का भी आनंद लिया, जो भारत और इंडोनेशिया के बीच मौजूद साझा सांस्कृतिक इतिहास की याद दिलाता है।
भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी ने विहार धर्म रत्न ग्रुप के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत होमेज टू द ट्रिपल जेम नामक प्रदर्शन की भी प्रशंसा की। इस प्रस्तुति में भगवान बुद्ध की कालजयी शिक्षाओं और त्रिरत्न के मूल्यों को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि इंडोनेशिया के लोग अपनी बौद्ध विरासत को जिस तरह से संजोकर और आगे बढ़ा रहे हैं, वह प्रेरणादायक है। यह सांस्कृतिक कूटनीति का एक अनूठा उदाहरण है जो दोनों देशों को आध्यात्मिक रूप से आपस में जोड़ता है।
रणनीतिक साझेदारी और आगे का एजेंडा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस दौरे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत और इंडोनेशिया के बीच वर्ष 2018 में संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक बढ़ाया गया था। मौजूदा यात्रा उसी मजबूत नींव को और अधिक विस्तार देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वे इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा करेंगे। अपनी यात्रा के अगले पड़ाव में प्रधानमंत्री योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर कॉम्प्लेक्स का दौरा करेंगे। माना जा रहा है कि यह यात्रा न केवल राजनयिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि साझा सांस्कृतिक जड़ों को भी पुनर्जीवित करेगी। प्रधानमंत्री ने जकार्ता में मौजूद भारतीय प्रवासियों से मिलने के लिए भी अपनी उत्सुकता जताई है, जिनसे वे विभिन्न मुद्दों पर संवाद करेंगे।
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