आमतौर पर पुलिस का मुख्य कर्तव्य आम नागरिकों की सुरक्षा करना, उनकी शिकायतों को संवेदनशीलता से सुनना और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करना होता है। कई बार ऐसी परिस्थितियां देखने को मिलती हैं जहां पुलिसकर्मी खुद ही कानून अपने हाथ में ले लेते हैं और न्याय दिलाने के बजाय स्वयं फैसला सुनाने की कोशिश करने लगते हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो जनता का कानून व्यवस्था से भरोसा उठने लगता है। हालांकि, आज के समय में लोग अपने अधिकारों के प्रति काफी जागरूक हो चुके हैं। यदि पुलिस थाने में उनकी सुनवाई नहीं होती है, तो वे उच्च अधिकारियों या फिर न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाने से पीछे नहीं उठते। भ्रष्ट और लापरवाह पुलिस अधिकारियों की शिकायत जब वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित होती है। ऐसा ही एक बेहद चौंकाने वाला मामला बिहार के जमुई जिले से सामने आया है, जहां न्याय की गुहार लगाने पहुंचे एक पीड़ित को ही पुलिस ने प्रताड़ित कर दिया।
थाने पहुंचे पीड़ित को ही बना दिया मुजरिम
यह पूरा मामला जमुई जिले के चंद्रदीप थाने का है। यहां कार्यरत थानाध्यक्ष अरविंद कुमार और इसी पुलिस स्टेशन में तैनात सब-इंस्पेक्टर (एसआई) अमरजीत कुमार पर कर्तव्यों में घोर लापरवाही बरतने और पद का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। घटना के बाद जमुई के SP ने दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ त्वरित एक्शन लेते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पूरा मामला तब बिगड़ा जब इन दोनों पुलिस अधिकारियों ने थाने में शिकायत लेकर आए व्यक्ति को ही आरोपी बना दिया। पुलिस ने न केवल पीड़ित के खिलाफ मामला दर्ज किया, बल्कि उसे थाने के बंदी गृह यानी हाजत में भी बंद कर दिया। इस मनमानी की खबर जब वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, तो पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
हाजत में बंद कर समझौते के लिए बनाया दबाव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 19 जून की है। इस दिन सरेख यादव नाम का एक परिवादी अपनी शिकायत लेकर चंद्रदीप थाने पहुंचा था। सरेख यादव ने पुलिस को एक लिखित आवेदन देकर मामला दर्ज करने की गुहार लगाई थी। सामान्य प्रक्रिया के तहत पुलिस को उसकी शिकायत पर जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन, थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय सरेख यादव की शिकायत दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, थानाध्यक्ष और एसआई अमरजीत कुमार ने मिलकर फरियादी सरेख यादव को ही थाने के बंदी गृह में डाल दिया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने अपनी सीमाएं पार करते हुए पीड़ित पर विपक्षी पार्टी के साथ समझौता करने का चौतरफा दबाव बनाना शुरू कर दिया। न्याय दिलाने के बजाय पुलिस खुद विपक्षी दल की पैरवी करने में जुट गई थी।
एसडीपीओ की जांच रिपोर्ट के बाद एसपी का कड़ा एक्शन
पुलिस की इस प्रताड़ना और अनुचित व्यवहार के खिलाफ शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जमुई के SDPO ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की। SDPO ने अपनी जांच में पाया कि पीड़ित सरेख यादव की शिकायत को दबाने का प्रयास किया गया था और उस पर अवैध रूप से समझौते का दबाव बनाया गया था। जांच अधिकारी ने अपनी निष्पक्ष जांच रिपोर्ट तैयार कर जमुई के SP को सौंप दी। इस जांच रिपोर्ट में थानाध्यक्ष अरविंद कुमार और सब-इस्ंपेक्टर अमरजीत कुमार पर लगे सभी आरोप पूरी तरह से सच पाए गए। रिपोर्ट के आधार पर SP ने कानून का उल्लंघन करने वाले दोनों पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। इस कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि खाकी की आड़ में जनता को प्रताड़ित करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
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