बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की राह हुई आसान
बिहार के सरकारी कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राज्य सरकार ने नए डिग्री कॉलेजों में संविदा के आधार पर कुल 3,687 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के नए 211 डिग्री कॉलेजों के लिए यह भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। सबसे खास बात यह है कि इस भर्ती के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं आयोजित की जाएगी।
कौन से विषयों में है भर्ती और क्या है अंतिम तिथि
फिलहाल शिक्षा विभाग ने छह प्रमुख विषयों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन विषयों में पदों का विवरण इस प्रकार है:
- हिंदी के 635 पद
- अंग्रेजी के 674 पद
- अर्थशास्त्र के 597 पद
- इतिहास के 662 पद
- राजनीतिक विज्ञान के 596 पद
- समाजशास्त्र के 533 पद
जो भी इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे 15 जुलाई तक आधिकारिक माध्यम से ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।
भर्ती प्रक्रिया का स्वरूप
पटना यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक डॉ. अखिलेश कुमार ने इस भर्ती प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि यह बहाली संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर की जा रही है, इसलिए इसके लिए किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा का प्रावधान नहीं रखा गया है। अभ्यर्थियों का चयन पूरी तरह से उनके शैक्षणिक अंकों यानी एपीआई स्कोर और साक्षात्कार (इंटरव्यू) के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।
आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर की डिग्री होना अनिवार्य है। साथ ही, नेट, सेट या पीएचडी की योग्यता भी आवश्यक है। आयु सीमा की बात करें तो न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 43 वर्ष निर्धारित की गई है। भर्ती के तहत 20 और 27 जुलाई को इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 29 जुलाई तक मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति 7 अगस्त तक संबंधित कॉलेजों में कर दी जाएगी। अभी केवल 6 विषयों के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं, लेकिन भविष्य में अन्य विषयों के लिए भी रिक्तियां आ सकती हैं।
क्या है एपीआई स्कोर और कैसे होगा चयन
इस पूरी भर्ती में मेरिट सूची बनाने के लिए एपीआई (एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर) सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। कुल मेरिट में 88 अंक का एपीआई स्कोर होगा और 12 अंक का इंटरव्यू होगा। साक्षात्कार के 12 अंकों का विभाजन इस प्रकार है:
- शिक्षण शैली के लिए 6 अंक
- सवाल-जवाब के लिए 6 अंक
चर्चा है कि इन चयनित प्रोफेसरों को 57,700 रुपये का मूल वेतन और साथ में महंगाई भत्ता भी प्रदान किया जाएगा।
एपीआई स्कोर की गणना का विस्तृत पैमाना
एपीआई स्कोर की गणना में अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता के विभिन्न स्तरों को अलग-अलग वेटेज दिया गया है। शोध कार्यों के लिए अधिकतम 22 अंक रखे गए हैं, जिसमें पीएचडी के लिए 11 अंक और जेआरएफ के लिए 11 अंक मिलेंगे। यदि किसी के पास नेट क्वालिफिकेशन है तो उसे 8 अंक प्राप्त होंगे। शोध से संबंधित अधिकतम 22 अंक ही जोड़े जा सकेंगे।
स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर पर अंकों के आधार पर स्कोरिंग इस प्रकार होगी:
- 80 प्रतिशत से अधिक पर 26 अंक
- 70 से 80 प्रतिशत से कम पर 23 अंक
- 60 से 70 प्रतिशत से कम पर 20 अंक
- 55 से 60 प्रतिशत से कम पर 17 अंक
एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 50 से 60 प्रतिशत के बीच अंक होने पर भी 17 अंक का प्रावधान है। स्नातक स्तर पर 80 प्रतिशत से अधिक पर 17 अंक, 70 से 80 प्रतिशत पर 15 अंक, 60 से 70 प्रतिशत पर 13 अंक, 55 से 60 प्रतिशत पर 11 अंक और 45 से 55 प्रतिशत पर 9 अंक दिए जाएंगे। 45 प्रतिशत से कम अंक होने पर कोई अंक नहीं मिलेगा।
इंटरमीडिएट के लिए अधिकतम 13 अंक और मैट्रिक के लिए अधिकतम 10 अंक निर्धारित हैं, जिनकी गणना प्राप्त प्रतिशत के आधार पर सूत्र के जरिए की जाएगी। इन्हीं अंकों के योग से अंतिम एपीआई स्कोर तैयार होगा, जो उम्मीदवार की मेरिट तय करेगा।
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