ज्योतिष शास्त्र में रत्नों को विशेष स्थान दिया गया है। माना जाता है कि प्रत्येक रत्न का संबंध किसी न किसी ग्रह से होता है और जब उसे सही विधि से धारण किया जाता है तो उस ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। लेकिन अक्सर लोग पूरी जानकारी के बिना ही रत्न पहन लेते हैं, जबकि ज्योतिष में हर रत्न के लिए एक तय दिन, धातु और उंगली बताई गई है। आइए जानते हैं कि किस रत्न को किस उंगली में धारण करना शुभ माना गया है।
माणिक (रूबी) के लिए अनामिका उंगली
ज्योतिष के अनुसार माणिक को सूर्य ग्रह का रत्न माना जाता है। इसे रविवार के दिन धारण करना उत्तम बताया गया है और इसे अनामिका यानी रिंग फिंगर में पहनना चाहिए। मान्यता है कि रूबी पहनने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है, साथ ही लीडरशिप स्किल और समाज में पद-प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होती है।
मोती देता है मानसिक संतुलन
मोती को चंद्र ग्रह से जुड़ा रत्न माना जाता है। इसे सोमवार के दिन या चंद्रोदय के समय धारण करना शुभ कहा गया है। मोती को कनिष्ठा यानी छोटी उंगली में पहना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक सोच को मजबूती देता है।
मूंगा बढ़ाता है साहस
मूंगा मंगल ग्रह का प्रतिनिधि रत्न है। इसे मंगलवार के दिन तांबे या सोने में जड़वाकर अनामिका उंगली में पहनने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष में इसे साहस, ऊर्जा और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने वाला रत्न माना गया है।
पन्ना के लिए छोटी उंगली
हरे रंग का पन्ना बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। इसे बुधवार के दिन धारण करना चाहिए और छोटी उंगली में पहना जाता है। माना जाता है कि पन्ना बुद्धि, वाणी, व्यापार और संवाद कौशल को बेहतर बनाने में सहायक होता है।
पुखराज के लिए तर्जनी सबसे शुभ
पुखराज को बृहस्पति ग्रह से जुड़ा रत्न माना जाता है। इसे गुरुवार के दिन सोने में जड़वाकर तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर में पहनना शुभ कहा गया है। यह रत्न ज्ञान, भाग्य, वैवाहिक सुख और आर्थिक समृद्धि से जुड़ा माना जाता है।
हीरा किस उंगली में पहनें?
हीरा को शुक्र ग्रह का प्रतिनिधि रत्न माना जाता है, जिसे सौरमंडल का सबसे सुंदर ग्रह कहा गया है। इसे शुक्रवार के दिन सोने या प्लैटिनम में जड़वाकर अनामिका उंगली में पहनने से शुभ फल मिलने की मान्यता है। ज्योतिष के अनुसार यह आकर्षण, सुख-सुविधाओं और वैवाहिक जीवन में सकारात्मकता से जुड़ा रत्न है।
इन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी रत्न को पहनने से पहले उसकी उपयुक्तता की जांच करना जरूरी है। हर व्यक्ति की कुंडली और ग्रह स्थिति अलग होती है, इसलिए बिना सलाह के रत्न धारण करने से बचना चाहिए। माना जाता है कि सही दिन, धातु और उंगली का चयन करने पर ही रत्न से जुड़े लाभ प्राप्त होते हैं।
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