मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान हुआ था हादसा
राजस्थान की राजधानी जयपुर में 19 जून को हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद अब सरकार ने पीड़ित परिवार की सुध ली है। जगतपुरा इलाके के महल रोड पर अपना ठेला लगाकर गुजारा करने वाली रेशु गुप्ता उस समय गंभीर रूप से झुलस गई थीं, जब मुख्यमंत्री के संभावित काफिले के गुजरने से पहले पुलिस ने उनके ठेले को जोर से धक्का दे दिया था। इस धक्का-मुक्की के कारण ठेले पर रखा गर्म पानी रेशु गुप्ता पर गिर गया, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गईं। इस घटना ने पूरे शहर में चर्चा छेड़ दी थी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
सरकार उठाएगी इलाज का सारा खर्च
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने अब पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। नगर निगम कमिश्नर ओम कसेरा ने स्वयं पीड़िता के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हाल जाना। इस दौरान उन्होंने घोषणा की कि रेशु गुप्ता के उपचार का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि उनके इलाज में किसी भी तरह की कोई कमी न रहे।
आजीविका के लिए डेयरी बूथ की सौगात
इलाज के साथ ही पीड़िता के परिवार की आर्थिक स्थिति को संबल देने के लिए भी प्रशासन ने कदम उठाए हैं। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। इतना ही नहीं, भविष्य में परिवार की आजीविका सुरक्षित रहे, इसके लिए सरकार ने उन्हें एक डेयरी बूथ आवंटित करने का भी आश्वासन दिया है। इस पहल का उद्देश्य परिवार को उस संकट से बाहर निकालना है, जिसमें वे ठेला क्षतिग्रस्त होने के कारण फंस गए थे।
दोषी पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
इस घटना के बाद से ही पुलिस प्रशासन के रवैये की कड़ी आलोचना हो रही थी। जनता का आरोप था कि वीआईपी मूवमेंट के नाम पर आम नागरिकों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। इस आक्रोश को देखते हुए रामनगरिया थाने के उन पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है, जो उस समय वहां तैनात थे और जिन्होंने ठेले को धक्का दिया था। इन सभी दोषी पुलिसकर्मियों को APO (अवेइटिंग पोस्टिंग ऑर्डर्स) कर दिया गया है।
निष्पक्ष जांच और सख्त रुख
राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश जारी किए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वीआईपी ड्यूटी के नाम पर आम आदमी के साथ ऐसा बर्ताव कतई स्वीकार्य नहीं है। जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस संवेदनहीन कृत्य के लिए जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ विभागीय नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भविष्य में दोषियों पर और अधिक सख्त प्रशासनिक कदम उठाने के संकेत भी दिए गए हैं। प्रशासन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आम जनता की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है और किसी भी सूरत में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
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