नैनीताल में जाम का कहर: 'रिक्शे से 3 KM का सफर तय करने में पूरा एक घंटा', परेशान लोगों ने सुनाई आपबीती

उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल इन दिनों भारी ट्रैफिक जाम से जूझ रही है, जिससे स्कूल, अस्पताल, बाजार और दफ्तर तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक अब महज 3 किलोमीटर की दूरी तय करने में रिक्शे से करीब एक घंटा लग रहा है।

उत्तराखंड की मशहूर सरोवर नगरी नैनीताल इन दिनों पर्यटन सीजन की चहल-पहल के साथ-साथ बेकाबू ट्रैफिक जाम की मार भी झेल रही है। वीकेंड और छुट्टियों के दौरान शहर में उमड़ रही पर्यटकों की भीड़ ने यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव बना दिया है। हालत यह है कि अब सिर्फ बाहर से आने वाले सैलानी ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। शहर की मुख्य सड़कों पर घंटों तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं, जिसके चलते लोगों को स्कूल, अस्पताल, बाजार और कार्यालय तक पहुंचने में खासी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।

स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले जाम की समस्या सिर्फ पर्यटन सीजन के कुछ गिने-चुने दिनों में ही सामने आती थी, मगर अब यह रोजाना की मुसीबत बन चुकी है। कई बार शहर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुंचने में घंटों खर्च हो रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी मार स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ रही है। दूसरी ओर पर्यटक भी यातायात की बदहाली से नाराज दिख रहे हैं। उनका कहना है कि वे नैनीताल की प्राकृतिक खूबसूरती निहारने आए थे, लेकिन सड़कों पर घंटों फंसे रहने से उनकी यात्रा का सारा आनंद किरकिरा हो गया।

पर्यटन है आजीविका का आधार, पर मुश्किलें भी बढ़ीं

स्थानीय निवासी मंजू बोरा का कहना है कि नैनीताल की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन के सहारे टिकी हुई है और यहां के लोगों का कारोबार भी सैलानियों के दम पर ही चलता है। पर्यटन शहर के लिए संजीवनी की तरह है, लेकिन इसके साथ आने वाली दिक्कतों का हल निकालना भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने बताया कि इस समय जाम की स्थिति इतनी विकट हो गई है कि मल्लीताल से तल्लीताल तक, जिनके बीच की दूरी करीब 3 किलोमीटर है, रिक्शे से पहुंचने में लगभग एक घंटा लग रहा है। इससे बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। मंजू बोरा ने यह भी कहा कि पर्यटन सीजन में शहर में गंदगी की समस्या बढ़ जाती है और बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में भी अड़चनें आती हैं। हाल ही में जाम में एक एंबुलेंस के फंस जाने की घटना ने भी व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए थे।

लोअर माल रोड का काम अधूरा, बढ़ा दबाव

वहीं स्थानीय निवासी रुचिर साह का कहना है कि शहर की लोअर माल रोड का ट्रीटमेंट कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। विभाग की ओर से इस काम को मार्च-अप्रैल तक निपटाने का दावा किया गया था, लेकिन देरी के चलते यातायात का बोझ दूसरे रास्तों पर आ गिरा है। उन्होंने बताया कि शहर के प्रवेश द्वारों पर भी भारी भीड़ देखने को मिल रही है, जिससे पैदल चलने वालों और स्थानीय बाशिंदों को भी काफी दिक्कत हो रही है।

10 मिनट का रास्ता तय करने में लग रहा एक घंटा

स्थानीय निवासी दिनेश भोटिया के मुताबिक, इस वक्त नैनीताल में पर्यटकों की तादाद बहुत ज्यादा है, जिसका सीधा असर यातायात पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जिस जगह पहले महज 10 मिनट में पहुंचा जा सकता था, वहां अब एक घंटे तक का समय लग रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों को वक्त पर पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। लोअर माल रोड बंद रहने के कारण पूरा दबाव अपर माल रोड पर आ गया है, जिससे समूचे शहर में जाम के हालात बने हुए हैं।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

स्थानीय लोगों का मानना है कि पर्यटन और यातायात के बीच संतुलन बैठाना अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कारगर ट्रैफिक प्रबंधन और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था पर काम नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है।

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