मानसून के दौरान अमरूद की बागवानी का सही समय
खेती के क्षेत्र में यदि आप लंबी अवधि तक मुनाफे का जरिया बनाना चाहते हैं, तो मानसून का समय आपके लिए बेहद खास है। जुलाई और अगस्त का महीना न केवल खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि फलदार पौधों की रोपाई के लिए भी इसे सबसे अनुकूल माना जाता है। इस दौरान मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे अमरूद के नए पौधों की जड़ें काफी तेजी से विकसित होती हैं और पौधों के जीवित रहने की दर में भी बढ़ोतरी होती है। उद्यान विशेषज्ञों की मानें तो यदि किसान उन्नत किस्मों का चयन करें और सही वैज्ञानिक पद्धति को अपनाएं, तो आने वाले सालों में उन्हें शानदार उत्पादन मिल सकता है।
बाजार में इन उन्नत किस्मों की है बंपर मांग
स्थानीय उद्यान विकास अधिकारी सुधा पटेल ने बागवानी शुरू करने वाले किसानों के लिए कुछ महत्वपूर्ण किस्मों का सुझाव दिया है। अमरूद के बगीचे की शुरुआत के लिए लखनऊ-49, इलाहाबाद सफेदा, एप्पल अमरूद और थाई पिंक को सबसे बेहतर माना गया है। इलाहाबाद सफेदा अपनी विशिष्ट मिठास के कारण उपभोक्ताओं की पहली पसंद बना हुआ है। वहीं, लखनऊ-49 अपनी अधिक उत्पादन क्षमता के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, एप्पल अमरूद का आकर्षक लाल गूदा और थाई पिंक वैरायटी का बड़ा आकार बाजार में ग्राहकों को जल्दी आकर्षित करता है, जिससे किसानों को उपज का अच्छा दाम मिलता है।
थाई पिंक से होगा बंपर मुनाफा
विशेषज्ञों के मुताबिक, थाई पिंक किस्म किसानों के लिए कमाई का एक शानदार विकल्प साबित हो रही है। इस किस्म के फलों का वजन लगभग 300 से 800 ग्राम तक होता है। गुलाबी रंग का गूदा, बहुत कम बीज और इसका बड़ा आकार मंडियों में इसे सामान्य अमरूद से कहीं ज्यादा कीमत दिलवाता है। यदि किसान हाई-डेंसिटी प्लांटेशन तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, तो पौधे रोपने के महज 1.5 से 2 साल के भीतर ही उत्पादन मिलने लगता है। अनुकूल स्थितियों में, एक एकड़ जमीन से सालाना 5 से 8 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया जा सकता है।
बाग लगाने से पहले ध्यान रखें ये 5 जरूरी बातें
अमरूद की सफल खेती के लिए कुछ आधारभूत सावधानियां बरतना आवश्यक है। यहां 5 प्रमुख बिंदुओं का पालन करना फायदेमंद होगा:
- मिट्टी का चयन: खेती के लिए हमेशा अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी का ही चयन करें।
- गुणवत्तापूर्ण पौधे: पौधे हमेशा किसी प्रमाणित सरकारी या भरोसेमंद नर्सरी से ही खरीदें, ताकि गुणवत्ता में कोई समझौता न हो।
- गड्ढों की तैयारी: रोपाई से पहले 2×2×2 फीट या 1×1×1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें। इनमें 15 से 20 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद, नीम की खली और ट्राइकोडरमा का मिश्रण अवश्य भरें।
- दूरी का प्रबंधन: पारंपरिक तरीके में पौधों के बीच 5 से 6 मीटर की दूरी रखें, जबकि उन्नत किस्मों के लिए 6 से 8 मीटर की दूरी रखना उचित है।
- जल निकासी: सबसे अहम बात यह है कि खेत में वर्षा का पानी जमा नहीं होना चाहिए, क्योंकि जलभराव होने से पौधों की जड़ें सड़ने का खतरा बना रहता है।
शुरुआती देखभाल और बेहतर उत्पादन के तरीके
अमरूद के बाग की सफलता उसकी शुरुआती देखभाल पर टिकी होती है। रोपाई के दौरान यह सावधानी बरतें कि कलमी पौधे का जो जोड़ वाला हिस्सा है, वह मिट्टी के भीतर न दबे। तेज हवा और बारिश से नए पौधों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें लकड़ी का सहारा दें। साथ ही, खेत में दीमक और फफूंदजनित रोगों की लगातार निगरानी करते रहें। जितनी बेहतर तरीके से आप शुरुआत में पौधों की देखभाल करेंगे, पौधों की बढ़वार उतनी ही तेजी से होगी और भविष्य में फलों का उत्पादन भी उतना ही अधिक मिलेगा। यदि किसान सही तकनीक और प्रबंधन के साथ बागवानी करते हैं, तो अमरूद का बाग उनके लिए लंबे समय तक आय का एक स्थाई और लाभदायक जरिया बन सकता है।
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