इंदौर के बहुचर्चित हनी ट्रैप और शराब कारोबारी से कथित ब्लैकमेलिंग के मामले में पुलिस की पड़ताल लगातार आगे बढ़ रही है. इस प्रकरण में गिरफ्तार किए गए आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद अब जांच एजेंसी की निगाहें डिजिटल साक्ष्यों और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं.
डिजिटल साक्ष्यों पर टिकी जांच
पुलिस का स्पष्ट कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर वायरल हो रही किसी भी जानकारी की पुष्टि नहीं की जा सकती. यानी प्रमाणिक नतीजे फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेंगे.
क्राइम ब्रांच ने क्या बताया
क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश त्रिपाठी के अनुसार आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा चुका है. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपियों के बीच किस तरह की बातचीत हुई थी और क्या किसी प्रकार की वीडियो रिकॉर्डिंग या ब्लैकमेलिंग की कोई साजिश रची गई थी.
श्वेता जैन का नाम पहले भी जुड़ा
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी श्वेता जैन का नाम इससे पहले भी इसी तरह के मामलों में जुड़ चुका है. एजेंसियां इस पहलू की भी बारीकी से पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस प्रकरण में किसी व्यक्ति को वीडियो के जरिए दबाव में लेने या धमकाने का प्रयास किया गया था.
पूछताछ और साक्ष्य जुटाने का सिलसिला जारी
फिलहाल पुलिस मामले में लगातार पूछताछ कर रही है और मजबूत साक्ष्य जुटाने में जुटी हुई है. माना जा रहा है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर कई अहम राज खुल सकते हैं.
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