मिर्च का सफर: हरे से लाल होने की कहानी
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के अंतर्गत आने वाले हरसिद्धि प्रखंड में मिर्च की खेती का काम बड़े स्तर पर होता है। स्थानीय किसान अजीत सिंह ने मिर्च के लाल होने की प्रक्रिया पर से पर्दा उठाया है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या लाल मिर्च के लिए कोई अलग पौधा होता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
एक ही पौधे से मिलती है हरी और लाल मिर्च
किसान अजीत सिंह का कहना है कि हरी और लाल मिर्च अलग-अलग पौधों से पैदा नहीं होती हैं, बल्कि ये एक ही पौधे की उपज होती हैं। जब खेत में लगी मिर्च को सही समय पर नहीं तोड़ा जाता है, तो वह पूरी तरह पक जाती है और अपना रंग बदलकर लाल हो जाती है।
तैयार करने की प्रक्रिया और भंडारण
एक बार जब मिर्च लाल होकर पक जाती है, तो उसे तोड़कर धूप में सुखाने का काम शुरू होता है। किसान इसे करीब एक सप्ताह तक तेज धूप में सुखाते हैं। सूखने के बाद यह पूरी तरह तैयार हो जाती है, जिसे व्यापारी खरीदकर मिर्च पाउडर बनाने वाली कंपनियों तक भेज देते हैं। जहां हरी मिर्च बहुत जल्दी खराब हो जाती है, वहीं सूखी लाल मिर्च को आप आसानी से एक से दो साल तक सुरक्षित रख सकते हैं।
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