एक लाख की लागत से चार लाख तक की कमाई! करेले की खेती से युवा किसान अजय ने पाई बड़ी सफलता

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के युवा किसान अजय ने करीब चार एकड़ में करेले की खेती की, जिसमें लगभग एक लाख रुपये लागत आई और अब तक उन्हें तीन से चार लाख रुपये का मुनाफा मिल चुका है, जबकि फसल की तुड़ाई अब भी जारी है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के छोटे से गांव पैगा के रहने वाले युवा किसान अजय ने कम उम्र में ही खेती के क्षेत्र में बड़ी पहचान बना ली है। घर की कठिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण अजय 12वीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर सके। कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब मुश्किलें बढ़ीं, तो उन्होंने घर की आर्थिक हालत सुधारने और बेरोजगारी से उबरने के मकसद से खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने चार एकड़ में करेले की खेती शुरू की और ऐसी तकनीक अपनाई कि पहली ही बार में कम लागत में दोगुना फायदा हो गया।

अजय बताते हैं कि लॉकडाउन के समय रोजगार के अवसर बेहद सीमित हो गए थे। परिवार के साथ सलाह-मशविरा करने के बाद उन्होंने खेती को आमदनी का जरिया बनाने का निर्णय लिया। बाजार की मांग और संभावित मुनाफे को ध्यान में रखते हुए उन्होंने करेले की फसल को चुना, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।

करेले की खेती का तरीका

अजय के मुताबिक, बरसात के मौसम में सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए। इसके बाद ट्रैक्टर की मदद से खेत तैयार कर मेड़ बनाई जाती है। मेड़ों के बीच गोबर की खाद डालकर उसे मल्चिंग से ढक दिया जाता है। सिंचाई के बाद पौधों की रोपाई की जाती है। फसल की बढ़वार के दौरान कीटों और रोगों से बचाव के लिए जरूरी स्प्रे करना भी आवश्यक होता है।

जैविक खाद को बताया सबसे उपयोगी

अजय का मानना है कि करेले की खेती में गोबर की खाद सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होती है। किसान चाहें तो दूसरी जैविक खादों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन बेहतर उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए गोबर की खाद सबसे अच्छा विकल्प है।

एक लाख की लागत, चार लाख तक का मुनाफा

अजय आगे बताते हैं कि करीब चार एकड़ में करेले की खेती करने में लगभग एक लाख रुपये की लागत आई। इसके बदले अब तक उन्हें तीन से चार लाख रुपये का मुनाफा मिल चुका है और फसल की तुड़ाई अभी भी जारी है। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकती है।

युवाओं को खेती अपनाने की सलाह

अजय कहते हैं कि पढ़ाई पूरी करने के बाद बेरोजगारी से जूझ रहे युवा खेती को एक व्यवसाय के रूप में अपना सकते हैं। इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता पर निर्भर रहने के बजाय युवाओं को अपने दम पर कुछ नया करने की कोशिश करनी चाहिए।

बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने का सपना

12वीं तक पढ़ाई करने वाले अजय विवाहित हैं और एक बच्चे के पिता हैं। उनका सपना है कि उनके बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले और वह आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर या अपनी पसंद के किसी बड़े पद पर पहुंचकर परिवार और समाज का नाम रोशन करे।

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