तनावपूर्ण माहौल और बैरिकेडिंग का टूटना
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित कुल्हाल चेकपोस्ट पर गुरुवार शाम को हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब निहंग सिखों के एक समूह ने पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग को बलपूर्वक तोड़ दिया। यह घटना उस समय हुई जब निहंगों का जत्था हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जाने की जिद पर अड़ा था। कर्णप्रयाग में हाल ही में हुए विवाद के बाद से ही राज्य में निहंगों के प्रवेश को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।
पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी
कुल्हाल बैरियर पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पहले से ही पूरी तरह सतर्क था। जिला मजिस्ट्रेट आशीष चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोभाल स्वयं घटना स्थल पर मौजूद रहकर सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले हुए थे। सीमा पर तैनात पुलिस बल ने आने-जाने वाले वाहनों की गहनता से जांच की, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। पुलिस और निहंग प्रतिनिधियों के बीच दिन भर चली वार्ताओं के बावजूद, स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई थी।
अराजक स्थिति और पुलिस की कार्रवाई
निहंगों का यह जत्था मोहाली स्थित गुरुद्वारा सिंह शहीदां से रवाना होकर यहां पहुंचा था। पुलिस ने उन्हें हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर ही रोक दिया था, जिसके बाद कुल्हाल बैरियर और पांवटा साहिब गुरुद्वारे में बातचीत के कई दौर चले। हालांकि, इस संवाद के बीच प्रदर्शनकारियों का एक छोटा समूह बैरिकेडिंग को लांघकर आगे बढ़ गया। ग्रामीण पुलिस अधीक्षक पंकज गैरोला ने स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए है और कानून-व्यवस्था को हर हाल में बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल ने स्पष्ट किया कि शाम करीब पांच बजे जब जिरकपुर की तरफ से निहंगों का जत्था पहुंचा, तो अधिकांश लोगों ने बातचीत के बाद संयम दिखाया, लेकिन 15 से 20 लोगों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने का दुस्साहस किया। पुलिस अब न्यूनतम बल का प्रयोग कर रही है ताकि शांति बनी रहे, लेकिन साथ ही चेतावनी दी गई है कि कानून हाथ में लेने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विवाद की जड़: कर्णप्रयाग घटना
इस पूरे हंगामे की पृष्ठभूमि में 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई हिंसक झड़प है। उस दौरान स्थानीय निवासियों और निहंग सिखों के बीच किसी बात को लेकर विवाद गहरा गया था, जिसमें कथित तौर पर तलवारों का भी इस्तेमाल किया गया था। इस संघर्ष में स्थानीय लोगों के साथ-साथ एक निहंग भी घायल हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
प्रदर्शन कर रहे निहंगों ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। उनका कहना है कि वे हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए आए हैं और गुरबाणी का पाठ करना चाहते हैं। उनका दावा है कि वे स्थानीय लोगों के साथ किसी भी टकराव के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, उनकी मुख्य मांग गिरफ्तार किए गए उन चार साथियों की रिहाई है। निहंग प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक उनके साथी रिहा होकर उनके साथ पंजाब वापस नहीं लौटते, तब तक वे उत्तराखंड की सीमा से वापस नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस के उच्च अधिकारियों ने उन्हें इन निहंगों की जमानत प्रक्रिया में जल्द मदद करने का आश्वासन दिया है।
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