75 साल के खड़ेश्वर बाबा की अनूठी तपस्या, 22 साल से नहीं बैठे और अब 1000 किलोमीटर की दंडवत यात्रा पर निकले

सीकर के 75 वर्षीय संत शंकर दास महाराज ने मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए एक बेहद कठिन दंडवत यात्रा शुरू की है। वे पिछले 22 वर्षों से गौ माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिलाने के लिए खड़े रहकर तपस्या कर रहे हैं।

कठिन संकल्प के साथ शुरू हुई पदयात्रा

राजस्थान के सीकर जिले के दांतारामगढ़ तहसील के बाय गांव से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के 75 वर्षीय संत शंकर दास महाराज, जिन्हें लोग खड़ेश्वर बाबा के नाम से जानते हैं, एक ऐसी यात्रा पर निकले हैं जिसे पूरा करना किसी सामान्य व्यक्ति के लिए असंभव है। बाबा ने 1000 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए दंडवत यात्रा का संकल्प लिया है, जो सीधे मां वैष्णो देवी के दरबार तक जाएगी।

22 वर्षों से लगातार खड़े रहने का तप

खड़ेश्वर बाबा की तपस्या के बारे में सुनकर लोग दंग रह जाते हैं। बाबा पिछले 22 वर्षों से लगातार खड़े रहकर अपनी तपस्या कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने बैठने तक का त्याग कर दिया है। उनके इस कठोर तप का मुख्य उद्देश्य गौ माता को राष्ट्र माता का सम्मान दिलाना है। उनकी जीवनशैली पूरी तरह से आध्यात्मिक है और वे लंबे समय से इसी नियम का पालन कर रहे हैं।

यात्रा का मार्ग और उद्देश्य

यह यात्रा निर्जला एकादशी के शुभ अवसर पर शुरू की गई है। बाबा की दंडवत यात्रा का मार्ग काफी लंबा है जो कई राज्यों से होकर गुजरेगा:

  • राजस्थान
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • जम्मू

अपनी इस कठिन साधना के माध्यम से वे न केवल गौ माता के सम्मान की बात कर रहे हैं, बल्कि उनका उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और सनातन धर्म का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करना भी है। भक्त और स्थानीय लोग बाबा की इस अदम्य इच्छाशक्ति को देखकर उन्हें नमन कर रहे हैं और उनकी सुरक्षित यात्रा की कामना कर रहे हैं।

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