आम धारणा यही रहती है कि कंपनियां तभी अपने शेयरधारकों को डिविडेंड का तोहफा देती हैं जब उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा होता है। लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में कम से कम 39 ऐसी कंपनियां सामने आई हैं, जिन्होंने इस साल खुद स्टैंडअलोन शुद्ध घाटे (Net Loss) में रहते हुए भी डिविडेंड घोषित कर दिया।
दिलचस्प बात यह है कि इस डिविडेंड का सबसे बड़ा फायदा कंपनियों के प्रमोटरों को मिलने जा रहा है। इसकी वजह यह है कि इन कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 37% से लेकर 82% तक है। ऐसे में डिविडेंड के रूप में बंटने वाली रकम का बड़ा हिस्सा सीधे मालिकों की जेब में पहुंचेगा।
नुकसान से भी ज्यादा बांट दिया डिविडेंड
हैरान करने वाली बात यह है कि कई कंपनियों ने इस साल हुए अपने कुल घाटे से भी ज्यादा राशि डिविडेंड के तौर पर बांटने का ऐलान किया है। इनमें बॉश होम कम्फर्ट, सनटेक रियल्टी, NIIT लिमिटेड और एंटरटेनमेंट नेटवर्क इंडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं।
दरअसल इनमें से कई कंपनियों की सहायक कंपनियों (Subsidiaries) ने वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया था, जिससे कंसोलिडेटेड स्तर पर इन्हें लाभ हुआ। लेकिन भारतीय नियमों के अनुसार डिविडेंड का आधार स्टैंडअलोन नतीजे ही बने, और इसी ने प्रमोटरों की झोली भर दी।
घाटा करोड़ों में, फिर भी मोटा डिविडेंड
सिम्फनी लिमिटेड को इस साल 166 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन घाटा हुआ। इसके बावजूद कंपनी ने 450% यानी ₹9 प्रति शेयर का बंपर डिविडेंड घोषित किया। कंपनी कुल 63 करोड़ रुपये बांटेगी, जिसमें प्रमोटरों की 73.3% हिस्सेदारी होने के कारण अकेले उनके पास ₹46.2 करोड़ पहुंचेंगे।
बॉश होम कंफर्ट को 2.9 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, फिर भी कंपनी ने 36 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान कर दिया। कुल ₹98 करोड़ के इस डिविडेंड में से ₹80 करोड़ से अधिक की रकम सीधे प्रमोटरों के पास जाएगी।
ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स को ₹200 करोड़ से अधिक का स्टैंडअलोन घाटा हुआ है, बावजूद इसके इसने 250% डिविडेंड देने की घोषणा की है। कुल ₹71 करोड़ के फंड में से करीब ₹33 करोड़ प्रमोटरों के हिस्से में आएंगे।
इसी तरह आरएचआई मैग्नेशिया (RHI Magnesita India) ने ₹468 करोड़ का घाटा होने के बाद भी डिविडेंड घोषित किया है। वहीं ईआईडी पैरी इंडिया ने ₹708 करोड़ और बजाज इलेक्ट्रोनिक्स ने ₹77 करोड़ का घाटा होने के बावजूद डिविडेंड देने की घोषणा की है।
क्या घाटे में भी मिल सकता है डिविडेंड?
कंपनी एक्ट के तहत यह जरूरी नहीं है कि डिविडेंड सिर्फ चालू वर्ष के मुनाफे से ही दिया जाए। अगर कोई कंपनी इस साल घाटे में है, तब भी वह कुछ शर्तों के साथ अपने पिछले सालों के संचित लाभ (Accumulated Profits) या फ्री रिजर्व के फंड का इस्तेमाल कर डिविडेंड बांट सकती है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमोटर भले ही इस समय अपनी हिस्सेदारी के दम पर मोटा कैश घर ले जा रहे हों, लेकिन मंदी या घाटे के दौर में जरूरत से ज्यादा रिजर्व खाली करना कंपनी की लॉन्ग टर्म ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है।
https://hindi.news18.com/news/business/share-market-39-loss-making-companies-paid-dividends-in-fy26-promoters-walk-away-with-the-biggest-gains-ws-l-10538671.html