सीकर: पशुपालकों की बड़ी राहत, अब चारे की जांच के लिए जयपुर नहीं जाना होगा, 16 लाख में तैयार हुई लैब

सीकर में नई पशु पोषाहार प्रयोगशाला शुरू होने से पशुपालकों को अब चारे की गुणवत्ता जांच के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। इस आधुनिक लैब के जरिए पशुओं के चारे की शुद्धता की पहचान अब स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगी।

सीकर में पशुपालकों के लिए बड़ी सुविधा

सीकर के पशुपालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब उन्हें अपने पशुओं के चारे की गुणवत्ता की जांच करवाने के लिए जयपुर या अन्य बड़े शहरों के चक्कर काटने की मजबूरी नहीं रहेगी। जिला मुख्यालय पर ही पशु पोषाहार प्रयोगशाला का शुभारंभ किया गया है, जहां अब चारे की जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। इस पूरी परियोजना पर करीब 16 लाख रुपये की लागत आई है।

क्या-क्या होगी जांच

प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने जानकारी दी है कि वर्तमान में इस लैब के प्रथम चरण में चारे में मौजूद मिट्टी, नमी और राख की मात्रा की जांच की जाएगी। चारे में नमी या मिट्टी की अधिकता सीधे तौर पर पशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। इस नई व्यवस्था से पशुपालक अपने चारे की शुद्धता और उसकी उपयोगिता को आसानी से समझ सकेंगे।

भविष्य में मिलेगी और उन्नत सुविधा

प्रयोगशाला को और आधुनिक बनाने का काम जारी है। इसके आगामी चरणों में प्रदेश स्तर से मिलने वाली उन्नत मशीनों के माध्यम से चारे में प्रोटीन, फाइबर और वसा की भी जांच की जाएगी। ये तत्व पशुओं के संतुलित आहार और उनके दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी हैं। इन वैज्ञानिक परीक्षणों से पशुपालन के क्षेत्र में नए दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

समय और पैसे की बचत

अब तक पशुचारे के नमूनों को जांच के लिए जयपुर या अन्य बड़े केंद्रों पर भेजा जाता था, जिसमें काफी समय और धन खर्च होता था। स्थानीय स्तर पर प्रयोगशाला के शुरू होने से यह प्रक्रिया अब काफी सरल और तेज हो गई है। जांच रिपोर्ट मिलने में होने वाली देरी अब खत्म हो जाएगी, जिससे पशुपालकों को अपने पशुओं के आहार में समय रहते सुधार करने का मौका मिलेगा।

पशु स्वास्थ्य और उत्पादकता में होगा सुधार

इस प्रयोगशाला के माध्यम से मिलावटी और घटिया चारे की पहचान करना बेहद आसान होगा। प्रमाणित जांच रिपोर्ट मिलने से पशुपालक यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि उनके पशुओं को पर्याप्त पोषण मिल रहा है या नहीं। बेहतर पोषण मिलने से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और दुग्ध उत्पादन में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा। प्रयोगशाला में आवश्यक उपकरणों को स्थापित कर दिया गया है और अब नियमित जांच का कार्य शुरू किया जा रहा है।

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