हौसले की मिसाल: 15 साल के गर्वित ने एक दिन के लिए संभाली जिला कलेक्टर की कुर्सी, भावुक हुआ माहौल

डीडवाना में जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल से डीएमडी जैसी लाइलाज बीमारी से जूझ रहे 15 वर्षीय गर्वित रेवाड़ को एक दिन के लिए जिला कलेक्टर बनने का मौका मिला। उनकी संघर्षपूर्ण कहानी आज हजारों युवाओं की प्रेरणा बन रही है।

कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो शरीर की कमजोरी भी रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसी ही एक भावुक कर देने वाली मिसाल डीडवाना में देखने को मिली, जहां जिला प्रशासन की एक संवेदनशील पहल ने 15 वर्षीय गर्वित रेवाड़ के सपने को हकीकत में बदल दिया।

एक दिन के लिए मिली कलेक्टर की जिम्मेदारी

डीएमडी जैसी गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे गर्वित को एक दिन के लिए जिला कलेक्टर की भूमिका निभाने का अवसर दिया गया। जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने स्वयं उनका स्वागत किया और उन्हें कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने का मौका दिया।

बैठक में जनता की समस्याओं पर जोर

कलेक्टर की कुर्सी पर बैठते ही गर्वित ने पूरी गंभीरता के साथ अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने अधिकारियों की बैठक ली और जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान पर विशेष जोर दिया।

पढ़ाई में भी अव्वल

पढ़ाई के मोर्चे पर भी गर्वित ने अपनी प्रतिभा साबित की है। उन्होंने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 82.83 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।

हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा

विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हार न मानने वाले गर्वित की यह संघर्षपूर्ण कहानी आज हजारों युवाओं को आगे बढ़ने का हौसला दे रही है। यह पहल इस बात की भी मिसाल है कि संवेदनशील प्रशासन किसी का सपना किस तरह साकार कर सकता है।

https://hindi.news18.com/photogallery/rajasthan/nagaur-didwana-garvit-rewad-becomes-one-day-district-collector-dmd-patient-inspiring-story-ws-l-10538721.html