निर्जला एकादशी 2026: जानिए इस दिन का महत्व और क्यों इसे माना जाता है सबसे खास

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस दिन बिना जल और अन्न के व्रत रखने से पूरे साल की एकादशियों का पुण्य मिल जाता है।

निर्जला एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी का विशेष स्थान है। इसे सभी चौबीस एकादशियों में सबसे अधिक फलदायी माना गया है। इस दिन भक्त कठोर तप का पालन करते हुए बिना जल और अन्न ग्रहण किए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं।

क्यों खास है यह व्रत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति साल भर की अन्य एकादशियों का व्रत करने में असमर्थ रहता है, वह केवल निर्जला एकादशी के पालन से संपूर्ण पुण्य प्राप्त कर सकता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक शर्मा के अनुसार, यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति दिलाने में सहायक है, बल्कि भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करता है।

जीवन में सुख और समृद्धि का मार्ग

विधि-विधान के साथ इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मकता आती है। भक्त इस दिन विशेष पूजा-अर्चना के माध्यम से ईश्वर से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हैं। यह व्रत संयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक अनुशासन का संचार होता है।

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