PoK के बाद बलूचिस्तान में फूटा गुस्सा, आसिम मुनीर की बढ़ी मुश्किलें

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बाद अब बलूचिस्तान में भी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के खिलाफ बड़ा जन-आंदोलन शुरू हो गया है। बलूच नेताओं को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद पूरे प्रांत में विरोध की आग फैल गई है।

बलूचिस्तान में गहराया संकट

पाकिस्तान के हुक्मरानों और रावलपिंडी में बैठे फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के खिलाफ बलूचिस्तान में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में पहले से ही विद्रोह की चिंगारी धधक रही है, और अब बलूचिस्तान के हालात ने पाकिस्तानी सेना की नींद उड़ा दी है। बलूच यकजेहती कमेटी यानी BYC की प्रमुख नेता माहरंग बलूच और उनके साथियों को एक आतंकवाद रोधी अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद वहां हालात तनावपूर्ण हो गए हैं।

बंद से थमा जनजीवन

इस फैसले के विरोध में बुधवार को बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में ऐतिहासिक बंद का नजारा दिखा। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और बाजार पूरी तरह ठप रहे। जानकारों का मानना है कि बलूचिस्तान में पूर्ण चक्का जाम पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका है। बलूचिस्तान क्षेत्रफल के आधार पर पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और यह देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। यहाँ के सुई इलाके से निकलने वाली प्राकृतिक गैस और रेको दिक जैसी खदानों से मिलने वाला सोना और तांबा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। बंद के कारण इन क्षेत्रों की सप्लाई चेन टूटने से पाकिस्तान को हर दिन करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

गुप्त सुनवाई पर उठे सवाल

BYC ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर प्रदर्शनों की तस्वीरें साझा की हैं। संगठन का कहना है कि यह हड़ताल राजनीतिक बदले की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के खिलाफ है। अदालत ने जिन नेताओं को उम्रकैद की सजा सुनाई है, उनमें माहरंग बलूच के अलावा बलाच कादिर, अबू बकर कलांची और सिबगतुल्लाह शाह शामिल हैं। यह मामला फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़ा बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि क्वेटा जेल के अंदर बंद कमरे में हुई यह सुनवाई न्यायसंगत नहीं थी, जिसे लोग 'बिना चेहरे वाली सुनवाई' कह रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना

बलूच नेताओं को मिली सजा पर वैश्विक स्तर पर भी नाराजगी जताई गई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया की कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने कहा कि यह फैसला निष्पक्ष सुनवाई के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है और आतंकवाद विरोधी कानूनों का उपयोग शांतिपूर्ण आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने भी इस कार्रवाई को न्याय का खुला उल्लंघन करार दिया है। संगठन का कहना है कि डॉ. माहरंग बलूच का एकमात्र अपराध मानवाधिकारों के उल्लंघन को दुनिया के सामने लाना रहा है, जिसके कारण उन्हें राज्य के दमन का शिकार बनाया जा रहा है।

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