मानव सेवा का अनूठा जज्बा
सीतामढ़ी जिले में समाजसेवा की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जो हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। समाजसेवी डॉ. राजीव कुमार काजू ने हाल ही में सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में पहुंचकर 61वीं बार स्वैच्छिक रक्तदान किया है। 43 वर्ष की आयु में इस स्तर पर रक्तदान का संकल्प लेना वाकई सराहनीय है।
रक्त का कोई विकल्प नहीं
रक्तदान करने के उपरांत डॉ. काजू ने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प अब तक विज्ञान नहीं बना पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति की तमाम उपलब्धियों के बावजूद जरूरतमंदों के लिए रक्त का इंतजाम केवल इंसानी दान से ही संभव है। उनका मानना है कि एक यूनिट रक्त किसी मरणासन्न व्यक्ति के लिए जीवनदान साबित होता है और किसी उजड़ते हुए परिवार की खुशियां लौटा सकता है।
युवाओं से की आगे आने की अपील
डॉ. काजू ने समाज के सभी वर्गों, विशेषकर युवाओं और सामाजिक संस्थाओं से रक्तदान महादान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यदि समाज का हर स्वस्थ व्यक्ति नियमित रूप से रक्तदान करे, तो समय पर खून न मिलने के कारण होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि वे खुद प्रसिद्ध समाजसेवी अतुल भैया से प्रेरित होकर साल में चार बार रक्तदान करते हैं।
रक्तदान के स्वास्थ्य लाभ
डॉ. राजीव कुमार काजू ने रक्तदान को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को खारिज करते हुए इसके वैज्ञानिक फायदे भी बताए। उन्होंने कहा:
- नियमित रक्तदान से शरीर में नए रक्त का संचार होता है।
- यह प्रक्रिया शरीर को ऊर्जावान बनाती है और कई गंभीर बीमारियों से रक्षा करती है।
- एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने के अंतराल पर सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है।
डॉ. काजू के इस कार्य की जिले भर में प्रशंसा हो रही है और वे अन्य लोगों को भी इस पुनीत कार्य से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
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