लंबे समय से जूझ रही हैं महिलाएं
मध्य प्रदेश के बालाघाट के बूढ़ी इलाके में पिछले करीब 45 साल से शराब की एक दुकान चल रही है। समय के साथ इलाके में आबादी बढ़ी और मकानों का निर्माण हुआ, जिससे दुकान के आसपास का वातावरण प्रभावित होने लगा। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दुकान पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती रही हैं और लोगों को खुले में शराब पिलाने की सुविधा दी जाती है। इस वजह से नशे में धुत लोग गलियों में हंगामा करते हैं, जिससे इलाके की शांति भंग होती है और महिलाओं व बच्चों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
प्रदर्शन का अनोखा अंदाज
शराब दुकान की वजह से बढ़ती परेशानियों से तंग आकर महिलाओं ने 13 अप्रैल 2026 को मोर्चा खोल दिया। इस आंदोलन की खास बात यह रही कि महिलाओं ने उग्र विरोध के बजाय गांधीवादी रास्ता अपनाया। उन्होंने शराब खरीदने आने वालों को गुलाब के फूल देकर और माला पहनाकर शर्मिंदा करने की कोशिश की, जिसका असर भी देखने को मिला। इससे पहले, महिलाओं ने दुकान की अर्थी निकालकर भी अपना विरोध दर्ज कराया था।
राजनीतिक उपेक्षा के बाद भी हौसले बुलंद
आंदोलन की शुरुआत में कई नेताओं ने आकर बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन धीरे-धीरे सबने इस मुद्दे से पल्ला झाड़ लिया। अब इस प्रदर्शन को 73 दिन बीत चुके हैं। बावजूद इसके, महिलाओं का कहना है कि उनकी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक दुकान यहां से नहीं हट जाती। महिलाओं का मानना है कि भले ही अभी दुकान नहीं हटी है, लेकिन उनके संघर्ष से इलाके में हुड़दंग कम हुआ है और उन्हें एक हद तक सुकून मिला है।
प्रशासन का रुख
इस मामले को लेकर नगरपालिका अध्यक्ष ने जानकारी दी है कि स्थानीय निवासियों की मांग को प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के समक्ष रखा गया है। इलाके की महिलाएं अब किसी भी स्थिति में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और उनका कहना है कि चाहे गर्मी हो या बारिश, उनका धरना तब तक चलता रहेगा जब तक उन्हें इस समस्या से पूरी तरह आजादी नहीं मिल जाती।
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