अलवर में फलों के नाम पर परोसा जा रहा ज़हर, कैल्शियम कार्बाइड से पकाए जा रहे आम

राजस्थान के अलवर में आम और अन्य फलों को प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड से पकाने का मामला सामने आया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है।

फलों की चमक के पीछे छिपा है जानलेवा खतरा

गर्मियों के मौसम में आम का लुत्फ उठाना हर किसी को पसंद है, लेकिन बाजार से खरीदे गए आम आपकी सेहत बिगाड़ सकते हैं। राजस्थान के अलवर जिले, विशेष रूप से खैरथल-तिजारा और किशनगढ़ क्षेत्रों की मंडियों और गोदामों में एक चौंकाने वाला खेल चल रहा है। यहाँ आम, केला और पपीता जैसे फलों को प्राकृतिक तरीके के बजाय प्रतिबंधित रसायन कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग करके तेजी से पकाया जा रहा है।

कैसे काम करता है यह खतरनाक तरीका

पड़ताल में सामने आया है कि व्यापारी कच्चे फलों के कार्टन में कैल्शियम कार्बाइड की पुड़िया रख देते हैं। यह रसायन नमी के संपर्क में आते ही एसिटिलीन गैस छोड़ता है, जिससे फल महज 24 घंटे के भीतर पीले पड़ जाते हैं। व्यापारियों के अनुसार, 10 किलो कच्चे आम को बाजार में बेचने योग्य बनाने के लिए 5 से 10 पुड़िया कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है और केवल तीन दिन के भीतर फल बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि सब कुछ सेटिंग के जरिए संचालित होता है, जिसके चलते उन्हें कार्रवाई का डर नहीं है।

सेहत पर गहरा असर

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि कैल्शियम कार्बाइड एक प्रतिबंधित पदार्थ है। उन्होंने बताया कि ऐसे फलों के सेवन से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • जी मिचलाना और चक्कर आना।
  • उल्टी और पेट दर्द की समस्या।
  • गंभीर मामलों में बेहोशी।
  • लंबे समय तक सेवन से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा।

मिलावटी फलों की पहचान कैसे करें

विशेषज्ञों के अनुसार, आम खरीदते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि आप मिलावटी फलों से बच सकें:

  • यदि आम का रंग असामान्य रूप से एकदम समान पीला दिख रहा हो।
  • फल बाहर से पका हुआ लगे लेकिन अंदर से कच्चा हो।
  • फलों में प्राकृतिक खुशबू का अभाव हो।
  • स्वाद में मिठास की जगह कसैलापन महसूस हो।
  • छिलके पर पीले और हरे रंग का अस्वाभाविक मिश्रण दिखाई दे।

विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली

गोदामों में खुलेआम चल रहे इस गोरखधंधे ने स्वास्थ्य विभाग और उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन जमीनी स्तर पर जांच के लिए पर्याप्त लैब सुविधाओं की कमी और निरीक्षण का अभाव इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। फिलहाल, आम उपभोक्ता अनजाने में इन जहरीले फलों को खाने के लिए मजबूर हैं।

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