बिहार के सियासी गलियारे में इस समय बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों को लेकर हलचल तेज है। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी को एक बड़ी और अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा है। इस शिकस्त के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से ही अलग-अलग सुर उठने लगे हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कद्दावर विधायक अनंत सिंह ने इस चुनावी नतीजे पर अपनी बेबाक प्रतिक्रिया दी है। अनंत सिंह का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी राजनेता अपने दम पर नहीं जीतता या हारता, बल्कि जनता ही असली भाग्यविधाता होती है। जनता जिसे चाहती है, उसे ही जीत का सेहरा पहनाती है।
जनता के गुस्से का शिकार बनी बीजेपी: अनंत सिंह
जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने इस चुनाव में हार के कारणों पर खुलकर बात की। उन्होंने राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि हर तरफ इस बात की चर्चा हो रही है कि मतदाताओं ने उन्हें वोट दिया था, लेकिन उन्हें बीच में ही पद से हटा दिया गया। अनंत सिंह ने स्पष्ट किया कि हालांकि नीतीश कुमार अपनी खुद की रणनीति और योजना के तहत पीछे हटे थे, लेकिन आम जनता के बीच यह संदेश गया कि उन्हें जबरन हटाया गया है। यही वजह है कि वोटरों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
अनंत सिंह ने आगे चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब आने वाले समय में जहां भी चुनाव होंगे, वहां सत्तारूढ़ गठबंधन को इसी तरह के हालात का सामना करना पड़ सकता है। जनता के भीतर इस बात को लेकर तीव्र रोष है कि उन्होंने मुख्यमंत्री किसे बनाने के लिए मतदान किया था और अंत में किसे बना दिया गया। लोगों का मानना है कि वे किसी और चेहरे के नाम पर वोट देते हैं और बाद में राजनीतिक दल आपस में ही सीटों और पदों की अदला-बदली कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चुनाव में जनता का पूरा भरोसा नीतीश कुमार पर था, और उनके हटने से जनता के बीच एक बहुत ही गलत संदेश गया है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का पलटवार
दूसरी तरफ, बांकीपुर उपचुनाव में मिली इस करारी हार पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि है और वे इस हार को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं। हालांकि, उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि विरोधियों को इस एक जीत से बहुत ज्यादा उत्साहित या खुश होने की जरूरत नहीं है।
गिरिराज सिंह ने अतीत का हवाला देते हुए याद दिलाया कि साल 2009 में भी नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA ने बिहार के उपचुनावों में 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उस समय गठबंधन को भारी नुकसान उठाना पड़ा था और वे 12 सीटें हार गए थे। लेकिन इसके ठीक एक साल बाद, यानी साल 2010 के विधानसभा चुनाव में NDA ने जोरदार वापसी की और रिकॉर्ड 89% स्ट्राइक रेट के साथ बिहार में अपनी सरकार बनाई थी। इसलिए, इस एक चुनावी नतीजे को अंतिम मानकर जश्न मनाना जल्दबाजी होगी।
प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक चुनावी शुरुआत
बांकीपुर विधानसभा सीट के इतिहास की बात करें तो यह सीट साल 1995 से लगातार बीजेपी के पास सुरक्षित रही थी। इस गढ़ पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार विधानसभा चुनाव जीतते आ रहे थे। उनसे पहले उनके पिता भी इस सीट से कई बार विधायक चुने जा चुके थे, जिससे यह सीट पूरी तरह से बीजेपी का किला मानी जाती थी। लेकिन इस बार उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस अभेद्य किले को ढहा दिया। प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों के एक बेहद बड़े अंतर से शानदार और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जो उनके राजनीतिक सफर की पहली चुनावी जीत है।
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