संघर्ष की अनोखी कहानी
सागर के रहने वाले 36 वर्षीय रजत सोनी ने अपनी मेहनत और अटूट विश्वास के दम पर सफलता की एक ऐसी मिसाल कायम की है जो हर किसी को प्रेरित करती है। आंखों की दिव्यांगता रजत के सपनों के आड़े नहीं आई। उन्होंने 6 बार एमपीपीएससी परीक्षा में भाग लिया, जिसमें से 6 बार उन्होंने मुख्य परीक्षा पास की और 5 बार इंटरव्यू राउंड तक का सफर तय किया।
बहन और पत्नी बनीं आंखों की रोशनी
तैयारी के कठिन दौर में रजत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी बड़ी बहन दीपमाला और पत्नी वैजयंती सोनी को दिया है। जब रजत को पढ़ाई में बाधा आई, तब इन दोनों ने ही उन्हें घंटों किताबें और नोट्स पढ़कर सुनाए। इसी सहयोग की बदौलत रजत अपनी पढ़ाई को निरंतर जारी रख सके।
लैब टेक्नीशियन से डिप्टी कलेक्टर तक का सफर
रजत सोनी ने धैर्य और संकल्प के साथ एक के बाद एक कई पद हासिल किए। अपनी यात्रा के दौरान उनका चयन लैब टेक्नीशियन, नायब तहसीलदार और असिस्टेंट कमिश्नर के पदों पर हुआ। आखिरकार, कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्होंने डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्ति पाई। वर्तमान में रजत सागर कलेक्ट्रेट में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अलग अलग विभागों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
हार न मानने का जज्बा
रजत की कहानी उन युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो विपरीत परिस्थितियों में घबरा जाते हैं। उनकी सफलता के प्रमुख स्तंभ रहे हैं:
- परिवार का अटूट सहयोग और मार्गदर्शन।
- लगातार 6 बार मुख्य परीक्षा तक पहुंचने का धैर्य।
- हार न मानने का मजबूत इरादा।
- लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण।
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