ग्रीन एसएम के ड्राइवरों का फूटा गुस्सा, ₹40,000 के वादे के बदले हाथ में आए सिर्फ ₹1,064

दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में शुरू हुई इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस ग्रीन एसएम विवादों में घिर गई है। ड्राइवरों ने कंपनी पर सैलरी के वादों को पूरा न करने और बेहद कम भुगतान करने का आरोप लगाया है।

दिल्ली में इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस पर उठे सवाल

दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर वियतनाम की विनफास्ट समर्थित इलेक्ट्रिक टैक्सी कंपनी ग्रीन एसएम (Green SM) मुश्किलों में फंसती नजर आ रही है। कंपनी ने ड्राइवरों को भर्ती करते समय ₹35,000 से ₹40,000 मासिक आय का सब्जबाग दिखाया था, लेकिन अब ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें इस वादे के मुकाबले बेहद मामूली रकम मिल रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में ड्राइवर अपना हक मांगते हुए और कंपनी के खिलाफ नाराजगी जताते हुए साफ देखे जा सकते हैं।

सैलरी का विवाद और ड्राइवरों का दावा

कंपनी ने बाजार में उतरते समय दावा किया था कि वह ड्राइवरों को फिक्स्ड सैलरी और निश्चित आय प्रदान करेगी, जो ओला और उबर जैसे प्लेटफॉर्म के कमीशन आधारित मॉडल से कहीं बेहतर होगा। हालांकि, काम शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद हकीकत सामने आने लगी। ड्राइवरों का आरोप है कि उन्हें दी जाने वाली न्यूनतम बिजनेस गारंटी की शर्तों में कंपनी ने अचानक बदलाव कर दिए हैं। एक ड्राइवर ने तो यहां तक दावा किया कि एक हफ्ते की मेहनत के बाद उसे कुल ₹1,064 ही भुगतान किए गए हैं, जबकि उसे हर महीने अच्छी आय का भरोसा दिया गया था।

शिकायतों की प्रमुख वजहें

ड्राइवरों की नाराजगी के पीछे कई बड़े कारण हैं, जिन्हें वे लगातार सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर उठा रहे हैं:

  • परफॉरमेंस आधारित कटौती: राइड एक्सेप्टेंस रेट और अन्य मानकों के नाम पर ड्राइवरों की कमाई में बड़ी कटौती की जा रही है।
  • शर्तों में बदलाव: जॉइनिंग के समय दी गई गारंटियों में बाद में कई तरह की जटिल योग्यता शर्तें जोड़ दी गईं।
  • आर्थिक तंगी: वादा की गई मासिक आय न मिलने से ड्राइवरों के सामने परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

कंपनी का रुख और आगे की राह

इस पूरे मामले पर फिलहाल ग्रीन एसएम की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, चर्चा है कि कंपनी का भुगतान मॉडल पूरी तरह से परफॉरमेंस मीट्रिक्स पर आधारित है। यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो कंपनी की विस्तार योजनाएं, जिसमें बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर शामिल हैं, उन पर संकट के बादल छा सकते हैं। यह पूरा घटनाक्रम भारत के उभरते हुए इलेक्ट्रिक टैक्सी सेक्टर में किए जाने वाले बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

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