पैनिक अटैक और हार्ट अटैक में भ्रम क्यों होता है?
पैनिक अटैक और हार्ट अटैक के दौरान महसूस होने वाले लक्षण इतने समान होते हैं कि कोई भी व्यक्ति भ्रमित हो सकता है। जब सीने में अचानक दर्द उठता है, बहुत अधिक पसीना आता है, हाथ सुन्न होने लगते हैं या दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज हो जाती है, तो स्वाभाविक रूप से मन में हार्ट अटैक का डर बैठ जाता है। हालांकि, ये दोनों स्थितियां शारीरिक रूप से बिल्कुल अलग होती हैं।
कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉक्टर जेरेमी लंदन ने सोशल मीडिया पर इन दोनों स्थितियों के बीच का अंतर स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक और पैनिक अटैक के लक्षण एक जैसे होने के बावजूद, इनके पीछे का कारण अलग है।
लक्षणों का अंतर और आंतरिक कारण
डॉक्टर जेरेमी लंदन के अनुसार, हार्ट अटैक तब होता है जब शरीर की कोरोनरी धमनियों में रुकावट आ जाती है। इसके विपरीत, पैनिक अटैक का मुख्य कारण शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन की अचानक अत्यधिक वृद्धि है। यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य की दृष्टि से पूरी तरह फिट है, तो उसे पैनिक अटैक आने से हार्ट अटैक का खतरा नहीं होता है।
क्या पैनिक अटैक दिल को नुकसान पहुंचा सकता है?
विशेषज्ञ का कहना है कि अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति है, तो कभी-कभार आने वाला पैनिक अटैक सीधे तौर पर दिल का दौरा नहीं लाता। हालांकि, डॉक्टर जेरेमी लंदन ने इस बात पर जोर दिया है कि लगातार रहने वाली चिंता या घबराहट को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
- लगातार होने वाले पैनिक अटैक हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
- जिन लोगों को पहले से ही दिल की कोई बीमारी है, उनके लिए पैनिक अटैक की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
- तनाव और चिंता का लंबा दौर हृदय प्रणाली पर निरंतर दबाव डालता है, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है।
अंत में विशेषज्ञ का यही सुझाव है कि हालांकि एक स्वस्थ हृदय पैनिक अटैक के दबाव को झेलने में सक्षम होता है, लेकिन मानसिक तनाव को नजरअंदाज करना दिल की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
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