बीपीएससी में सफलता का परचम: बड़े भाई के त्याग से एसडीएम बने नवादा के अनंत लाल

नवादा के झौर गांव के रहने वाले अनंत लाल ने बीपीएससी परीक्षा में 159वीं रैंक लाकर एसडीएम का पद हासिल किया है। अपनी इस बड़ी कामयाबी का श्रेय उन्होंने अपने बड़े भाई के उस संघर्ष को दिया है, जिन्होंने उनके सपनों के लिए अपनी पढ़ाई तक कुर्बान कर दी।

सफलता की अनोखी कहानी

बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के नतीजे सामने आने के बाद नवादा जिले के वारिसलीगंज प्रखंड स्थित झौर गांव में जश्न का माहौल है। गांव के होनहार लाल अनंत लाल ने इस कठिन परीक्षा में 159वीं रैंक हासिल कर एसडीएम का पद अपने नाम किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बनी हुई है।

बड़े भाई का त्याग बना आधार

अनंत लाल ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने परिवार और विशेष रूप से अपने बड़े भाई के संघर्ष को दिया है। भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि परिवार की माली हालत ठीक न होने के कारण उनके बड़े भाई ने अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ दी थी ताकि वे काम करके अनंत की पढ़ाई का खर्च उठा सकें। भाई की इसी मेहनत और त्याग के कारण अनंत आज प्रशासनिक सेवा में उच्च पद तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं।

भव्य स्वागत और सम्मान

जब अनंत लाल अपने पैतृक गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। वारिसलीगंज से लगभग 12 किलोमीटर दूर खराट मोड़ पर ही सैकड़ों लोग डीजे और ढोल-नगाड़ों के साथ उनके स्वागत के लिए मौजूद थे। वहां से एक लंबा काफिला उन्हें उनके गांव झौर तक ले गया। गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने फूल-मालाओं और अंगवस्त्र के साथ उनका अभिनंदन किया। अनंत ने गांव पहुंचकर सबसे पहले मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

शिक्षा का सफर

अनंत लाल ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के मध्य विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने वारिसलीगंज के एसजीबीके साहू प्लस टू विद्यालय से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और स्नातक की डिग्री एस.एन. सिन्हा कॉलेज से हासिल की। सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने BPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है।

क्षेत्र में खुशी की लहर

उनकी इस कामयाबी पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने भी हर्ष जताया है। विधायक अनीता देवी, पूर्व विधायक अरुणा देवी और शिक्षाविद गोविंद जी तिवारी समेत कई लोगों ने उन्हें बधाई दी है। ग्रामीणों का मानना है कि अनंत लाल की यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते और अपनी मेहनत से मंजिल तक पहुंचते हैं।

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