भरतपुर में कृषि का नया अध्याय
राजस्थान के भरतपुर जिले के वेर और भुसावर इलाके इन दिनों कृषि क्षेत्र में नई पहचान बना रहे हैं। यहां के किसान अब पारंपरिक फसलों के स्थान पर बागवानी को प्राथमिकता दे रहे हैं। मिट्टी की उर्वरता और मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के कारण यह क्षेत्र फलों के उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
फलों की खेती से बढ़ी आय
क्षेत्र में अब बड़े पैमाने पर आम, अमरूद, नींबू, पपीता, कटहल और चीकू जैसी फसलों की पैदावार हो रही है। बागवानी को अपनाने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। किसान न केवल पारंपरिक खेती की सीमाओं से बाहर निकल रहे हैं, बल्कि बाजार की मांग के अनुरूप फसलों का चयन भी कर रहे हैं।
आधुनिक तकनीक का कमाल
खेती की इस नई तस्वीर के पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण का बड़ा हाथ है। किसान उत्पादन और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित तकनीकों का सहारा ले रहे हैं:
- ड्रिप इरिगेशन यानी बूंद बूंद सिंचाई पद्धति का उपयोग।
- उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत किस्म के पौधों का रोपण।
- बागवानी संबंधी वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाना।
सरकारी योजनाओं का मिल रहा लाभ
कृषि विभाग की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और सरकारी सहायता ने किसानों का उत्साह बढ़ाया है। इन सुविधाओं के चलते किसान बागवानी में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा है।
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