खेती में नया प्रयोग
बिहार के छपरा जिले में खेती का तरीका तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक रूप से धान और गेहूं की बुवाई करने के बजाय, अब किसान नकदी फसलों की ओर अपना रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में मांझी प्रखंड के युवा किसान दीपू शाह ने करेले की खेती से एक मिसाल कायम की है। उन्होंने कम उम्र में ही कृषि वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण प्राप्त किया और तभी से वे लगातार इसी आधुनिक कृषि में जुटे हुए हैं।
मचान विधि और जैविक खेती का लाभ
दीपू शाह अपनी खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। वे मुख्य रूप से मचान विधि से करेले की खेती करते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और पैदावार अधिक मिलती है। इसके साथ ही, वे पूरी तरह से जैविक खाद का उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है और करेले स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी होते हैं। उनके इस अनूठे और वैज्ञानिक तरीकों को देखकर क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।
मुनाफा और बाजार का विस्तार
इस आधुनिक विधि की बदौलत दीपू शाह एक सीजन में 5 लाख से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं। उनके द्वारा उगाए गए करेले की मांग स्थानीय बाजारों के अलावा आसपास के जिलों और राज्यों में भी है। उनके पास से व्यापारी बड़ी मात्रा में माल खरीदकर निम्नलिखित स्थानों पर ले जाते हैं:
- सीवान
- गोपालगंज
- बलिया
- सुरेमनपुर
- गोरखपुर
आज मांझी प्रखंड का करेला अपनी खास पहचान बना चुका है और कई राज्यों के बाजारों तक अपनी पहुंच बना रहा है, जिससे इलाके के अन्य किसानों को भी नई उम्मीदें मिली हैं।
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