पार्टी पर कब्जे की कोशिश
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे घमासान ने नया मोड़ ले लिया है। ऋताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में बागी गुट ने दावा किया है कि उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को उनके पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं, अभिषेक बनर्जी को भी राष्ट्रीय महासचिव पद से बर्खास्त करने की घोषणा की गई है। इस बागी गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है।
असली टीएमसी होने का दावा
बागी गुट ने खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व को सीधे चुनौती दी है। बागियों का कहना है कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का कार्यकाल खत्म होने के बावजूद उसे दोबारा गठित नहीं किया गया, जिसके आधार पर उन्होंने यह कदम उठाया है। हालांकि, ममता समर्थक खेमे ने इस पूरी कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिया है।
चुनाव आयोग तक पहुंच सकता है मामला
पार्टी पर नियंत्रण की यह लड़ाई अब संगठन से लेकर कानूनी गलियारों तक पहुंच सकती है। यदि यह विवाद नहीं सुलझा, तो मामला भारतीय निर्वाचन आयोग के पास जाना तय माना जा रहा है। आयोग निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर फैसला ले सकता है:
- पार्टी के संविधान के प्रावधान।
- सांसदों और विधायकों का बहुमत किस गुट के साथ है।
- संगठन के पदाधिकारियों का समर्थन।
चुनाव चिन्ह पर संकट
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पार्टी दो हिस्सों में बंटती है, तो चुनाव चिन्ह किसे मिलेगा। यदि निर्वाचन आयोग को लगता है कि पार्टी का वास्तविक विभाजन हो गया है, तो वह चुनाव चिन्ह को अस्थायी रूप से फ्रीज कर सकता है। ऐसी स्थिति में दोनों खेमों को नए नाम और नए चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव मैदान में उतरना पड़ सकता है। अतीत में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मामले में ऐसी स्थिति देखने को मिली है।
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