तृणमूल कांग्रेस में बड़ा विद्रोह: बागी गुट ने अरूप रॉय को बनाया अध्यक्ष, अभिषेक बनर्जी की भूमिका खत्म

तृणमूल कांग्रेस में मचे घमासान के बीच बागी विधायकों ने अपना नया नेतृत्व चुन लिया है। बागी गुट ने पार्टी के संविधान का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग को इसकी सूचना देने की बात कही है।

पार्टी पर कब्जे की कोशिश में बागी गुट का बड़ा कदम

तृणमूल कांग्रेस में जारी आंतरिक कलह ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में बागी खेमे ने सोमवार को एक विशेष सत्र का आयोजन किया और विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष घोषित कर दिया। यह घटनाक्रम पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। बागी नेताओं ने दावा किया है कि यह बदलाव पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़े उलटफेर की शुरुआत है।

नया संगठनात्मक ढांचा और पद

बागी खेमे ने पार्टी की नई कार्यकारिणी की घोषणा की है, जिसमें कई बड़े चेहरों को शामिल किया गया है। इस कदम के जरिए ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद से दरकिनार कर दिया गया है। नई नियुक्तियों में मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम शामिल हैं:

  • अरूप बिस्वास, फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
  • रीताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
  • अखरुज्जमां अंसारी को पार्टी का नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है।

निर्वाचन आयोग तक जाएगी बात

बैठक के बाद रीताब्रता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया पार्टी के संविधान के दायरे में रहकर की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली तृणमूल कांग्रेस वही हैं और इस विशेष सत्र की कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को सौंपी जाएगी। बनर्जी ने कहा कि अब वे जिला स्तर और प्रदेश इकाई के साथ ही प्रवक्ताओं के पैनल का गठन भी जल्द ही करेंगे।

वित्तीय और राजनीतिक मोर्चों पर संकट

पार्टी की अंदरूनी लड़ाई अब वित्तीय खातों तक पहुंच गई है। पुलिस ने बागी विधायकों की शिकायत के आधार पर पार्टी के तीन बैंक खातों में मौजूद करीब 440 करोड़ रुपये के लेन-देन पर रोक लगा दी है। वहीं, राजनीतिक आंकड़ों की बात करें तो पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने बागी गुट का समर्थन किया है। इसके अलावा, संसद में भी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है, जहां 28 में से 20 लोकसभा सदस्यों ने तृणमूल संसदीय दल से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया है और राजग को समर्थन देने का फैसला किया है।

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