आखिरी बड़े मंगल पर करें बजरंगबली की विशेष पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त और विधि

ज्येष्ठ माह के अंतिम बड़े मंगल पर हनुमान जी की उपासना का विशेष महत्व है। इस लेख में जानिए पूजा का सही समय, विधि और प्रभावी मंत्र।

बड़े मंगल का महत्व

सप्ताह का हर मंगलवार हनुमान जी की भक्ति के लिए समर्पित होता है, लेकिन ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। ज्येष्ठ के सभी मंगलवार 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' के नाम से जाने जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ के महीने में ही हनुमान जी की पहली बार प्रभु श्री राम से भेंट हुई थी, जिस कारण इस महीने के मंगलवार को अन्य दिनों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष 23 जून को ज्येष्ठ का आखिरी बड़ा मंगल मनाया जाएगा।

पूजा के शुभ मुहूर्त

अंतिम बड़े मंगल पर हनुमान जी की कृपा पाने के लिए तीन विशेष मुहूर्त अत्यंत फलदायी हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 4 मिनट से सुबह 4 बजकर 44 मिनट तक।
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक।
  • संध्या काल मुहूर्त: शाम 7 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक।

पूजा करने की सही विधि

हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए नीचे दी गई विधि का पालन करें:

  • सबसे पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो लाल, नारंगी या केसरिया रंग के वस्त्र पहनें और पूजा का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल पर लाल रंग के आसन का प्रयोग करें। बजरंगबली की प्रतिमा के समक्ष धूप और दीप प्रज्वलित करें।
  • भगवान को लाल पुष्प और सिंदूर अर्पित करें।
  • भोग के रूप में केला, बूंदी, बेसन के लड्डू, गुड़-चना या चूरमा का प्रसाद रखें। ध्यान रहे कि भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें।
  • श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती संपन्न करें।

हनुमान जी के सिद्ध मंत्र

पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है:

  • ॐ हनुमते नमः
  • ॐ ऐं भ्रीम हनुमते, श्री राम दूताय नमः।
  • ॐ आंजनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्।
  • ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।

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