भारतीय संगीत की दुनिया में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जिन पर वक्त का असर नहीं पड़ता। ऐसी ही एक अनमोल आवाज थी प्रसिद्ध गायक एसपी बालासुब्रमण्यम की। अपनी सुरीली गायकी और एक के बाद एक बनाए गए रिकॉर्डों के बूते उन्होंने कई पीढ़ियों के दिलों पर अपनी छाप छोड़ी। आज भी उनके गाए गीत लोगों की जुबान पर बने हुए हैं। आज 4 जून को उनके जन्मदिवस के अवसर पर हम आपको उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें बता रहे हैं।
संगीत के लिए छोड़ी इंजीनियरिंग की राह
बचपन से ही संगीत में गहरी रुचि रखने वाले एसपी बालासुब्रमण्यम ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ-साथ संगीत की शिक्षा लेना भी शुरू कर दिया था। उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगू और कन्नड़ के अलावा मलयालम भाषा में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। साल 2020 में कोरोना के चलते इस दिग्गज गायक का निधन हो गया था।
पिता का सपना था बेटा बने इंजीनियर
4 जून 1946 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में जन्मे बालासुब्रमण्यम का परिवार कला और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ था। उनके पिता एस.पी. सांबामूर्ति हरिकथा कलाकार थे और चाहते थे कि उनका बेटा इंजीनियर बने। पिता की इच्छा का मान रखते हुए बालासुब्रमण्यम ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू भी की, लेकिन टाइफाइड की बीमारी के कारण उन्हें यह पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। इसके बाद उनका रुझान संगीत की ओर हो गया और वे चेन्नई पहुंच गए।
एक ही दिन में रिकॉर्ड किए 21 गाने
एसपी बालासुब्रमण्यम की प्रतिभा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक ही दिन में 21 गाने रिकॉर्ड करने का अनूठा कारनामा कर दिखाया था। 8 फरवरी 1981 को बेंगलुरु में संगीतकार उपेंद्र कुमार के लिए उन्होंने यह रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा एक दिन में 19 तमिल और 16 हिंदी गाने रिकॉर्ड करके भी उन्होंने अपनी अलग पहचान कायम की।
जब MGR ने रोक दी थी रिकॉर्डिंग
साल 1969 में एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने बालासुब्रमण्यम की लोकप्रियता को साबित कर दिया। तमिल सिनेमा के दिग्गज एमजी रामचंद्रन अपनी फिल्म Adimai Penn के गीत 'आयिरम निलावे वा' की रिकॉर्डिंग करवाना चाहते थे। इसी दौरान बालासुब्रमण्यम की तबीयत बिगड़ गई। हैरानी की बात यह रही कि एमजीआर ने किसी और गायक से गाना रिकॉर्ड कराने के बजाय करीब एक महीने तक इंतजार किया। जैसे ही बालासुब्रमण्यम स्वस्थ हुए, उन्होंने यह गीत रिकॉर्ड किया, जो आगे चलकर बेहद लोकप्रिय साबित हुआ।
हिंदी सिनेमा में ऐसे रखा कदम
साल 1981 में फिल्म 'एक दूजे के लिए' के जरिए उन्होंने हिंदी फिल्मों में प्रवेश किया। इस फिल्म का मशहूर गीत 'तेरे मेरे बीच में' लोगों के दिलों में बस गया और इस गाने के लिए उन्हें एक और राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।
बने सलमान खान की आवाज
90 के दशक में एसपी बालासुब्रमण्यम बॉलीवुड में भी खूब लोकप्रिय हो गए। खासकर सलमान खान की फिल्मों में उनकी आवाज को दर्शकों ने बेहद पसंद किया, यहां तक कि वे सलमान खान की आवाज ही बन गए थे। 'मैंने प्यार किया' का गीत 'दिल दीवाना' हो या 'हम आपके हैं कौन' का 'दीदी तेरा देवर दीवाना', उनके गाए ये गीत आज भी लोगों की पसंदीदा प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं।
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