बाजार में अनिश्चितता का माहौल
पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात और अमेरिका व ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब कानपुर के शेयर बाजार पर साफ देखा जा सकता है। वैश्विक अनिश्चितता के कारण स्थानीय निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है, जिसके चलते लोग या तो अपनी मौजूदा एसआईपी बंद कर रहे हैं या फिर बाजार में नया पैसा लगाने से कतरा रहे हैं।
तेजी से बढ़ रही एसआईपी बंद होने की दर
म्यूचुअल फंड उद्योग के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में 31 मई तक कानपुर में 49,289 नई एसआईपी शुरू हुईं, जबकि इसी अवधि के दौरान 48,405 एसआईपी बंद कर दी गईं। यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि शहर में अब हर 100 नई एसआईपी के मुकाबले करीब 98 एसआईपी बंद हो रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 2023-24 के दौरान यह आंकड़ा प्रति 100 एसआईपी पर महज 52 था, जो अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।
विशेषज्ञों की राय और एयूएम की स्थिति
शेयर बाजार विशेषज्ञ राजीव सिंह का कहना है कि कोरोना काल के बाद यह पहली बार है जब निवेशक इतनी बड़ी संख्या में असमंजस में हैं। हालांकि, चिंताजनक आंकड़ों के बीच राहत की बात यह है कि कानपुर का कुल एसआईपी एयूएम चार वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञ संतोष गुप्ता का मानना है कि वैश्विक हालात सामान्य होते ही निवेशकों का भरोसा फिर से बहाल होगा, लेकिन फिलहाल सतर्कता का दौर जारी है।
निवेशकों ने क्यों मोड़ा मुंह
बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच कानपुर के निवेशक कई कारणों से अपने निवेश को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं:
- बाजार में लगातार बनी अस्थिरता और अनिश्चितता।
- उम्मीद के अनुरूप रिटर्न न मिलना।
- आर्थिक दबाव और महंगाई का बढ़ता प्रभाव।
- भविष्य के जोखिमों को देखते हुए नकदी को प्राथमिकता देना।
लखनपुर की रहने वाली डॉ. शालिनी सिंह और साकेत नगर के रत्नीश जायसवाल जैसे निवेशकों का कहना है कि बाजार में स्पष्ट दिशा न होने की वजह से वे जोखिम लेने के बजाय इंतजार करना बेहतर समझ रहे हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराहट में निर्णय लेने के बजाय बाजार पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
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