बारिश में खुरों की देखभाल क्यों जरूरी है
मानसून का समय पशुपालकों के लिए बड़ी चुनौती लेकर आता है। इस मौसम में चारों ओर फैली नमी और कीचड़ के कारण गाय और भैंसों के खुर मुलायम होकर फटने लगते हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार, यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या फुट रॉट यानी खुर सड़न का रूप ले लेती है, जिससे पशुओं को फंगल संक्रमण होने का खतरा बना रहता है।
दूध के उत्पादन पर बुरा असर
जब पशुओं के पैरों में दर्द या संक्रमण होता है, तो वे लंगड़ाकर चलने लगते हैं। यह शारीरिक कष्ट सीधे तौर पर उनके स्वास्थ्य और खान-पान को प्रभावित करता है। इसका सबसे बड़ा असर दूध की मात्रा पर पड़ता है। संक्रमण के कारण पशुओं का दूध उत्पादन काफी घट जाता है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
संक्रमण से बचने के देसी और असरदार तरीके
भीलवाड़ा के पशु चिकित्सकों ने पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- पशुओं को हमेशा सूखे और ऊंचे स्थानों पर बांधें, ताकि उनके पैर हर समय कीचड़ में न रहें।
- खुरों की सफाई के लिए नीम के पानी या फिटकरी के पानी का इस्तेमाल करें।
- संक्रमण से बचाव के लिए हल्दी और सरसों के तेल का लेप तैयार कर खुरों पर लगाएं।
- अपने चारे का विशेष ध्यान रखें और इसे बारिश में भीगने से बचाएं।
विशेषज्ञों की सलाह
पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि यदि पशुओं के पैरों में घाव ज्यादा गहरा हो जाए या संक्रमण गंभीर दिखने लगे, तो किसी भी तरह की देरी न करें। ऐसे में तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें और पेशेवर सलाह लें। समय पर सही इलाज ही पशुओं को गंभीर बीमारी से बचा सकता है।
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