फादर्स डे पर भावुक हुए रजत बेदी, बचपन में ही पिता को खोने के दर्द को किया साझा

अभिनेता रजत बेदी ने फादर्स डे के अवसर पर अपने पिता और परिवार की फिल्मी विरासत को याद किया। उन्होंने बताया कि मात्र 9 साल की उम्र में पिता को खोना उनके लिए कितना मुश्किल था।

पिता की कमी का एहसास

फादर्स डे के खास मौके पर बॉलीवुड अभिनेता रजत बेदी ने अपने निजी जीवन के उन पन्नों को पलटा है, जिन्हें शायद ही कोई साझा करना चाहे। रजत ने बताया कि जब वह महज 9 साल के थे, तब उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। उस छोटी उम्र में उन्हें पिता के महत्व का पूरा अंदाजा नहीं था, लेकिन बड़े होने के साथ यह खालीपन उन्हें लगातार महसूस होता रहा।

मुश्किल समय में पिता का साथ

रजत बेदी का मानना है कि भले ही उनके पिता आज उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहता है। उन्होंने साझा किया कि जब भी जीवन में कोई परेशानी आती है या उन्हें असफलता का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें एक अदृश्य शक्ति का अनुभव होता है जो उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत देती है। उन्हें लगता है कि उनके पिता आज भी कहीं न कहीं उन्हें संभाल रहे हैं और सही राह दिखा रहे हैं।

फिल्मी विरासत और सुनहरी यादें

अभिनेता ने अपने पिता नरेंद्र बेदी के साथ बिताए गए उन चंद पलों को याद किया, जब वे उनके साथ शूटिंग सेट पर जाया करते थे। हालांकि उनके पिता एक व्यस्त निर्माता और निर्देशक थे, लेकिन वह समय उनके लिए बेहद कीमती था। रजत ने बताया कि उनके पिता का प्यार और उनका गले लगाना आज भी उनकी सबसे प्यारी यादों में शामिल है।

कला और साहित्य का परिवार

रजत बेदी ने अपने परिवार के गहरे फिल्मी और साहित्यिक इतिहास का भी जिक्र किया। उनके दादा राजिंदर सिंह बेदी उर्दू साहित्य के एक बड़े नाम थे, जिनका योगदान भारतीय सिनेमा और साहित्य में अतुलनीय है। रजत ने गर्व के साथ कहा कि उनके पिता नरेंद्र बेदी ने भी हिंदी सिनेमा में कई यादगार फिल्में दीं। आज रजत इसी विरासत को आगे ले जाने को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं और इसे केवल एक काम नहीं बल्कि अपने परिवार के नाम को सम्मान दिलाने का जरिया समझते हैं।

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