लाल किले पर छाई कैप्टन सोनिया सिंह चौहान की तस्वीर
स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा फहराया, तो उनके साथ नजर आईं भारतीय सेना की अधिकारी कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। पीएम के ठीक पीछे अत्यंत अनुशासन और गर्व के साथ खड़ी इस जांबाज अफसर की तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। यह पल न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी का निर्वहन था, बल्कि भारतीय 'नारी शक्ति' के उस बढ़ते प्रभाव का प्रतीक भी था, जो आज देश की रक्षा से लेकर राष्ट्रीय सम्मान के सबसे बड़े मंच तक मजबूती से मौजूद है।
कौन हैं कैप्टन सोनिया सिंह चौहान
कैप्टन सोनिया सिंह चौहान भारतीय सेना की एक कमीशन प्राप्त अधिकारी हैं। वे भारतीय सेना के उस नए और सक्षम नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो अपनी योग्यता और कठोर प्रशिक्षण के दम पर हर मोर्चे पर मुस्तैद रहती हैं। जब 15 अगस्त 2026 को पूरी दुनिया की निगाहें लाल किले की ओर थीं, तब कैप्टन सोनिया ने रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के संयुक्त तालमेल के अंतर्गत अपनी इस अहम भूमिका को बेहद बारीकी और अनुशासन के साथ पूरा किया। उनकी उपस्थिति इस बात का सबूत है कि भारतीय सेना में महिलाएं अब नई ऊंचाईयों को छू रही हैं।
ध्वजारोहण का जटिल सैन्य प्रोटोकॉल
लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रीय ध्वज फहराना एक अत्यंत कठिन और अनुशासित सैन्य प्रक्रिया है। इसके पीछे भारतीय सशस्त्र बलों का बेहद सख्त प्रोटोकॉल काम करता है, जिसे 'मिलिट्री प्रोटोकॉल' कहा जाता है। इसमें कुछ मुख्य बातें शामिल हैं:
- जीरो एरर टाइमिंग: तिरंगा फहराने की प्रक्रिया से लेकर राष्ट्रगान की धुन और 21 तोपों की सलामी के बीच का हर एक सेकंड पहले से तय होता है। इसमें रत्ती भर भी चूक की गुंजाइश नहीं होती।
- कोऑर्डिनेटिंग सर्विस: हर वर्ष भारतीय सेना की तीनों शाखाओं में से किसी एक को समारोह के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी दी जाती है।
- प्रधानमंत्री को सहयोग: रक्षा मंत्रालय द्वारा चयनित विशिष्ट अधिकारी को ही यह सम्मान मिलता है कि वे प्रधानमंत्री के साथ मंच पर खड़े होकर झंडे की रस्सियों, सलामी और औपचारिक प्रोटोकॉल को संभालें। इस ऐतिहासिक दिन के लिए संबंधित अधिकारियों को कई हफ्तों तक कड़ी रिहर्सल करनी पड़ती है।
देश की बेटियों के लिए प्रेरणा
कैप्टन सोनिया सिंह चौहान की लाल किले पर मौजूदगी ने भारत की लाखों युवा युवतियों के लिए प्रेरणा की एक नई लकीर खींची है। आज भारतीय सेना का स्वरूप तेजी से बदला है। अब महिलाओं की भागीदारी केवल कार्यालयों या प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं है। आज वे सियाचिन जैसी दुर्गम और बर्फीली चोटियों पर देश की रक्षा कर रही हैं, लड़ाकू विमानों की कमान संभाल रही हैं और लाल किले जैसे राष्ट्रीय आयोजनों पर तिरंगे की शान बढ़ा रही हैं। कैप्टन सोनिया की यह भूमिका हर उस बेटी को विश्वास दिलाती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
सेना में अफसर बनने की राह: कॉलेज से लाल किले तक
यदि आप या आपके परिवार की कोई बेटी कैप्टन सोनिया सिंह चौहान की तरह भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहती है, तो इसके लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी मार्ग है। सैन्य अधिकारी बनने की प्रक्रिया को निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:
- शैक्षणिक योग्यता: किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या कॉलेज से स्नातक की डिग्री अनिवार्य है।
- प्रवेश परीक्षा: स्नातक पूरा करने के बाद आप CDS यानी कम्बाइंड डिफेंस सर्विसेज की परीक्षा दे सकते हैं। यदि आपके पास NCC का 'C' सर्टिफिकेट है, तो आप NCC स्पेशल एंट्री के जरिए सीधे इंटरव्यू में शामिल होने का मौका भी पा सकते हैं।
- SSB और चिकित्सा परीक्षण: लिखित परीक्षा या शॉर्टलिस्टिंग के बाद, उम्मीदवारों को SSB इंटरव्यू और कड़े मेडिकल टेस्ट से गुजरना होता है।
- प्रशिक्षण: चयनित होने के बाद, उम्मीदवारों को चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी यानी OTA भेजा जाता है। यहाँ उन्हें कठिन सैन्य प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। इस ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन मिलता है और उनके कंधों पर सितारे सजते हैं।
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