हाथियों से जुड़ी पुरानी यादें
झारखंड के Palamu Tiger Reserve (PTR) की पहचान सिर्फ बाघों तक सीमित नहीं है। यहाँ पालतू हाथियों की एक लंबी और भावनात्मक विरासत रही है। इनमें Rajni नाम की हथिनी का जिक्र आज भी लोग सम्मान और प्यार से करते हैं। वर्ष 1976-77 के दौरान गुमला से लाए गए इस हाथी के बच्चे को बेतला लाया गया था। अपनी मासूमियत के कारण Rajni वनकर्मियों और स्थानीय लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय थी। वर्ष 1980 के आसपास उसकी मृत्यु के बावजूद उसकी यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
वन प्रबंधन में हाथियों का योगदान
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट Dr. D. S. Srivastava के अनुसार, एक दौर में पलामू के जंगलों में लकड़ी, लाख और बीड़ी पत्ता का बड़ा कारोबार था। उस समय घने जंगलों में आवागमन और निगरानी के लिए हाथियों का सहारा लिया जाता था। जहाँ आधुनिक वाहन नहीं पहुँच पाते थे, वहाँ वनकर्मी हाथियों की मदद से ही गश्ती करते थे। इससे जंगल की सुरक्षा और वन्यजीवों का संरक्षण करना काफी आसान हो जाता था।
पर्यटकों के लिए हाथी सफारी का रोमांच
बेतला में हाथी सफारी का अपना एक गौरवशाली इतिहास है। एक समय था जब सुबह और शाम 4 पर्यटकों को हाथी पर बिठाकर जंगल की सैर कराई जाती थी। इस अनुभव ने बेतला के पर्यटन को एक नई पहचान दी थी, क्योंकि पर्यटक हाथी पर बैठकर वन्यजीवों को बहुत करीब से देख पाते थे।
वर्तमान में मौजूद हाथी और उनकी देखभाल
मौजूदा समय में Palamu Tiger Reserve में कुल 4 पालतू हाथी हैं:
- Juhi
- Rakhi
- Sita
- Murgesh
इनमें से Murgesh एक नर हाथी है, जिसे कर्नाटक के Bandipur Tiger Reserve से उपहार के रूप में यहाँ भेजा गया था। Rakhi को एक बचाव अभियान के दौरान लाया गया था, जबकि Sita भी उपहार स्वरूप मिली हथिनी है। इन हाथियों के लिए विशेष शेड और उपचार के लिए कराल जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। वन विभाग का उद्देश्य है कि पर्यटकों को इन हाथियों और उनकी विरासत के बारे में बेहतर जानकारी मिल सके, जिसके लिए सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं।
https://hindi.news18.com/news/jharkhand/palamu-palamu-tiger-reserve-elephant-safari-gajraj-tourist-attraction-local18-ws-l-10588499.html