निर्जला एकादशी का महत्व
Nirjala Ekadashi का व्रत इस वर्ष 25 जून को रखा जाएगा। इस व्रत की खासियत यह है कि इसमें भक्त बिना जल पिए पूरे दिन उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एक दिन का व्रत साल भर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल देता है। साल 2026 में इस दिन शिव और सिद्ध योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन किए गए विशेष उपाय भगवान विष्णु और महादेव, यानी हरिहर दोनों को प्रसन्न करने के लिए काफी प्रभावी माने जाते हैं।
हरिहर का अभिषेक
निर्जला एकादशी के दिन शिव योग सुबह लगभग 11 बजे तक बना रहेगा। इस दौरान हरिहर का संयुक्त अभिषेक करना बहुत फलदायी है। इसके लिए आप इन स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:
- भगवान विष्णु और महादेव की तस्वीरों को एक साथ स्थापित करें।
- उनके सामने शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- जल या दूध से हरिहर का अभिषेक करें।
- अंत में फल और फूल अर्पित करें।
ऐसा करने से जीवन में हरि और हर दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गाय की सेवा
भगवान विष्णु और शिव जी की कृपा पाने के लिए गाय की सेवा करना सबसे सरल और उत्तम तरीका है। निर्जला एकादशी के शुभ अवसर पर गाय को हरा चारा खिलाएं और उन्हें जल पिलाएं। गाय के चरणों को स्पर्श कर आशीर्वाद लेने से जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है, साथ ही तमाम परेशानियां दूर होती हैं।
स्तोत्र का पाठ
निर्जला एकादशी की शाम को विष्णु सहस्रनाम और शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी बताया गया है। इन स्तोत्रों के पाठ से न केवल ईश्वर की कृपा मिलती है, बल्कि मन को गहरी शांति का अनुभव होता है। यह उपाय जीवन के कठिन समय से बाहर निकलने में भी मदद करता है। यदि आप बताए गए इन 3 उपायों में से कोई एक भी पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं, तो आपको शुभ फलों की प्राप्ति अवश्य होगी।
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