Shapit Dosh क्या है?
ज्योतिष शास्त्र में Shapit Dosh को सबसे अशुभ योगों में से एक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में यह दोष मौजूद हो, तो उसे जीवन के हर मोड़ पर कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ता है। यह योग जिस भी भाव में बनता है, उस भाव से मिलने वाले शुभ परिणाम रुक जाते हैं। इसलिए ज्योतिष में इसे लेकर सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
कुंडली में कैसे बनता है यह दोष?
जब किसी जातक की कुंडली में Saturn (शनि) और Rahu एक साथ स्थित होते हैं, तब Shapit Dosh का निर्माण होता है। इस योग के कारण व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है और बनते हुए काम अचानक बिगड़ सकते हैं। साथ ही स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर भी बुरा असर पड़ता है। कुंडली के अलग-अलग भावों में इसका प्रभाव भी भिन्न होता है:
- लग्न भाव: चरित्र पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
- दूसरे भाव: संपत्ति और धन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
- तीसरे भाव: पराक्रम और साहस में कमी आ सकती है।
- चौथे भाव: सुख-सुविधाओं में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
- पांचवें भाव: शिक्षा में रुकावटें आती हैं।
- छठे भाव: शत्रुओं का डर बना रहता है।
- सातवें भाव: वैवाहिक जीवन और पार्टनरशिप में खटास आ सकती है।
- आठवें भाव: जीवन में अचानक बड़े उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।
- नौवें भाव: भाग्य का साथ मिलना कम हो जाता है।
- दसवें भाव: करियर की स्थिति अस्थिर हो सकती है।
- ग्यारहवें भाव: लाभ कमाने में दिक्कतें आती हैं।
- बारहवें भाव: बड़े आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।
Shapit Dosh के प्रभाव कम करने के उपाय
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ विशेष धार्मिक और व्यावहारिक उपायों को अपनाकर इस दोष के बुरे प्रभावों को नियंत्रित किया जा सकता है:
- शनिवार के दिन Saturn के मंत्र 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' का जाप करें।
- बुधवार के दिन Rahu के मंत्र 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' का जाप करना फायदेमंद होता है।
- प्रतिदिन Hanuman Chalisa का पाठ करने से इस दोष का दुष्प्रभाव कम होता है।
- भगवान Shiva की पूजा और आराधना करने से प्रतिकूल प्रभाव दूर होते हैं।
- नियमित रूप से कौआ, कुत्ता और गाय को रोटी खिलाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करने से भी कुंडली के दोष शांत होते हैं।
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