20 जून का दिन क्यों है खास? जानें 138 साल पुराने Victoria Terminus का गौरवशाली इतिहास

मुंबई के प्रतिष्ठित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस को आज के ही दिन 138 साल पहले आम जनता के लिए खोला गया था। आइए जानते हैं विक्टोरिया टर्मिनस से लेकर विश्व धरोहर स्थल बनने तक का इसका सफर।

ऐतिहासिक दिन की शुरुआत

आज 20 जून की तारीख मुंबई के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है। आज से 138 साल पहले, 20 जून 1887 को इसे Victoria Terminus के नाम से आम लोगों के लिए खोल दिया गया था। जिसे आज हम Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus (CSMT) के नाम से जानते हैं, वह मुंबई की पहचान और गर्व का प्रतीक है। यूनेस्को ने भी इस इमारत को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है।

बोरी बंदर से सफर की शुरुआत

इस शानदार इमारत के बनने से पहले यहां Bori Bunder नाम का स्टेशन हुआ करता था। भारत की पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को यहीं से 34 किलोमीटर का सफर तय कर ठाणे तक गई थी। यह स्टेशन भारतीय रेलवे की आधारशिला बना और व्यापारिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा।

वास्तुकला का बेजोड़ नमूना

ब्रिटिश सरकार ने इसे दुनिया के सबसे बेहतरीन स्टेशन के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। इसकी जिम्मेदारी प्रसिद्ध वास्तुकार Frederick William Stevens को सौंपी गई थी।

  • निर्माण कार्य मई 1878 में शुरू हुआ और 1887 में पूरा हुआ।
  • इस परियोजना का शुरुआती बजट लगभग 16 लाख रुपये था।
  • इमारत के निर्माण में पीले मालाड पत्थर, सफेद पोरबंदर पत्थर और लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल हुआ है।
  • यह Bombay Gothic शैली का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें भारतीय और यूरोपीय कला का संगम दिखता है।

महारानी को समर्पित भव्य इमारत

महारानी विक्टोरिया की स्वर्ण जयंती के अवसर पर इसे Victoria Terminus नाम मिला। इसे बनाने में कुल 3 लाख पाउंड की लागत आई थी। स्टेशन के मुख्य द्वार पर ब्रिटिश शेर और भारतीय बाघ की मूर्तियां मौजूद हैं, वहीं सबसे ऊपर 14 फुट ऊंची 'प्रगति' की प्रतिमा स्थापित है। अंदरूनी हिस्से में इतालवी संगमरमर और सागौन की लकड़ी का अद्भुत उपयोग किया गया है।

एक वैश्विक पहचान

2 जुलाई 2004 को यूनेस्को ने इस इमारत को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। यह केवल एक रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि GIPR का मुख्यालय भी रहा है। समय के साथ 1996 में इसका नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और 2017 में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस कर दिया गया। हालांकि, आज भी मुंबई के लोग इसे प्यार से VT कहकर ही बुलाते हैं।

मुंबई की धड़कन

आज यह स्टेशन मुंबई की लाइफलाइन बना हुआ है।

  • यहां रोजाना 30 लाख से अधिक यात्री यात्रा करते हैं।
  • कुल 18 प्लेटफॉर्म से ट्रेनों का संचालन होता है।
  • पीक ऑवर्स के दौरान लगभग हर साढ़े तीन मिनट में एक लोकल ट्रेन यहां से गुजरती है।

अतीत की भव्यता और भविष्य की आधुनिकता को समेटे हुए, 138 साल बाद भी यह इमारत मुंबई के जज्बे की मिसाल बनी हुई है।

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