बरसात के दौरान गाय और भैंस के चारे में करें बदलाव, दूध का उत्पादन रहेगा बरकरार

मानसून के दौरान पशुओं को बीमारियो से बचाने और दूध की मात्रा बनाए रखने के लिए पशुपालकों को खान-पान में खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

बरसात के मौसम में पशुओं की देखभाल क्यों है जरूरी

जैसे ही मानसून का आगमन होता है, दुधारू पशुओं के लिए चुनौतियां बढ़ जाती हैं। जहानाबाद जिला पशुपालन कार्यालय की पशु चिकित्सक डॉक्टर रानी के अनुसार, बदलते मौसम का असर पशुओं के स्वास्थ्य पर सीधा पड़ता है। बरसात के समय न केवल पशुओं के रहने की जगह प्रभावित होती है, बल्कि चारे की उपलब्धता भी सीमित हो जाती है, जिससे पशुपालकों को स्टॉल फीडिंग पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता है।

चारे का सही अनुपात है बेहद जरूरी

डॉक्टर रानी ने बताया कि बरसात में पशुओं की डाइट में बदलाव करना बहुत आवश्यक है। सामान्य तौर पर लोग 40:60 (सूखा चारा और हरा चारा) का अनुपात अपनाते हैं, लेकिन बरसात में इसे बदलना पड़ता है। इसका मुख्य कारण यह है कि मानसून में हरा चारा जल्दी दूषित हो जाता है और अधिक नमी के कारण इसमें हानिकारक कीट पनप सकते हैं। यदि ऐसा चारा पशुओं को खिलाया जाए, तो वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।

पशुपालकों के लिए खास टिप्स

  • बरसात के दौरान चारे का अनुपात बदलकर 60:40 (सूखा चारा और हरा चारा) कर देना चाहिए।
  • पशुओं को हमेशा स्वच्छ पानी पिलाना सुनिश्चित करें।
  • पशुओं को कभी भी बासी चारा न दें, क्योंकि इससे पशुओं में डायरिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • खान-पान में सही संतुलन रखने से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध की मात्रा में भी कोई कमी नहीं आती है।

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