लाहौर का HQ-9 तो सिर्फ शुरुआत थी, भारत के 'छुटकू ब्रह्मास्त्र' मिनटों में करेंगे दुश्मन का खात्मा

ऑपरेशन सिंदूर में लाहौर में HQ-9 डिफेंस सिस्टम की तबाही के बाद अब भारत लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन्स की अपनी क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है।

लोइटरिंग म्यूनिशन की बढ़ती ताकत

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लाहौर में पाकिस्तान के HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम को जिस तरह एक छोटे से ड्रोन ने तबाह किया, उसने पूरी दुनिया को लोइटरिंग म्यूनिशन की घातक क्षमता दिखा दी। पाकिस्तान जिसे अपनी सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच मान रहा था, वह भारतीय ड्रोन्स के आगे टिक नहीं सका। अब भारत इसी तकनीक को और अधिक शक्तिशाली बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

भारत में बनेंगे आधुनिक ड्रोन्स

भारतीय कंपनी SMPP ने यूरोपीय डिफेंस ग्रुप KNDS के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इसके तहत भारत में ही अत्याधुनिक लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन्स का निर्माण किया जाएगा। इस साझेदारी की कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • इसमें कोलिब्री, लैरिने, वेलोस और रोड्योर जैसे उन्नत सिस्टम शामिल होंगे।
  • ये ड्रोन हवा में 45 मिनट से लेकर 3 घंटे तक रहने में सक्षम होंगे।
  • दुश्मन के इलाके में घुसकर ये ड्रोन्स सही मौके का इंतजार करते हैं और रडार या टैंकों को सटीक निशाना बनाते हैं।

स्वदेशी 'अग्निवेग' का दबदबा

भारत विदेशी तकनीक के साथ-साथ अपने स्वदेशी संसाधनों पर भी जोर दे रहा है। कंपनी ने भारतीय सेना को 106 यूनिट्स अग्निवेग सिस्टम पहले ही सौंप दिए हैं। अग्निवेग की प्रमुख खूबियां निम्नलिखित हैं:

  • इसकी ऑपरेशनल रेंज लगभग 180 किलोमीटर है।
  • यह भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग वाले वातावरण में भी बिना किसी रुकावट के काम कर सकता है।
  • दुश्मन द्वारा जीपीएस या कम्युनिकेशन सिस्टम बाधित करने पर भी यह अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम है।

भविष्य के युद्ध का नया स्वरूप

दुनिया भर में जारी हालिया संघर्षों ने यह साबित कर दिया है कि छोटे ड्रोन्स महंगे टैंकों और डिफेंस सिस्टम्स के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ये 'छुटकू ब्रह्मास्त्र' सीमा सुरक्षा में भारत की सबसे बड़ी ताकत साबित होंगे। मिसाइलों के मुकाबले ये ड्रोन्स दुश्मन के हर मूवमेंट पर नजर रख सकते हैं और टारगेट बदलने पर उसका पीछा भी कर सकते हैं।

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