एक प्रेरक सफर की शुरुआत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक छोटे से गांव उपरबेड़ा में हुआ था। संथाल आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाली द्रौपदी मुर्मू ने उस दौर में शिक्षा प्राप्त की, जब लड़कियों के लिए पढ़ाई का रास्ता बेहद कठिन हुआ करता था। वे अपने गांव की पहली लड़की बनीं, जिन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की और स्नातक की उपाधि हासिल की।
1979 में उन्होंने भुवनेश्वर के रामादेवी महिला महाविद्यालय से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में डिग्री प्राप्त की। वर्ष 1980 में उनका विवाह बैंक अधिकारी श्यामचरण मुर्मू के साथ हुआ।
कठिनाइयों से भरा जीवन और मानसिक मजबूती
द्रौपदी मुर्मू का व्यक्तित्व उनके जीवन की गंभीर त्रासदियों से और भी निखरकर सामने आया। उन्होंने अपने जीवन में कई अपनों को खोया, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी।
- 2009 में उन्होंने अपने 25 वर्षीय बड़े बेटे को खो दिया।
- 2013 में उनके दूसरे बेटे का निधन हो गया।
- इसके बाद उन्होंने अपनी मां और भाई को भी खो दिया।
- 2014 में उनके पति श्यामचरण मुर्मू भी चल बसे।
इतने बड़े-बड़े दुखों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने आध्यात्म और योग का सहारा लिया। ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़कर उन्होंने मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाया और डिप्रेशन पर विजय पाई।
राजनीति में सफलता के आयाम
द्रौपदी मुर्मू ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत से की, जहां वे पार्षद चुनी गईं। उनके राजनैतिक सफर के प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं:
- 2000 और 2009 में वे रायरंगपुर से दो बार विधायक चुनी गईं।
- 2000 में ओडिशा सरकार में परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन विभाग की मंत्री बनीं।
- 2007 में उन्हें ‘पंडित नीलकंठ दास - सर्वश्रेष्ठ विधायक’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- 2015 से 2021 तक उन्होंने झारखंड की 9वीं राज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
देश की 15वीं राष्ट्रपति
लंबे संघर्ष, समर्पण और जन-सेवा के अनुभव के बाद 25 जुलाई 2022 को द्रौपदी मुर्मू ने देश की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। वे न केवल देश की प्रथम नागरिक हैं, बल्कि आदिवासी समुदाय की पहली महिला राष्ट्रपति भी हैं।
स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उनका योगदान अतुलनीय है। संथाली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने और ‘ओल चिकी’ लिपि को बढ़ावा देने में उनके प्रयास आज भी याद किए जाते हैं।
द्रौपदी मुर्मू का जीवन संघर्ष, साहस और समर्पण की मिसाल है। यह साबित करता है कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच के साथ कोई भी शिखर छुआ जा सकता है।
https://hindi.news18.com/news/nation/draupadi-murmu-birthday-special-president-of-india-tribal-leader-life-journey-struggle-success-story-10586252.html