दिल्ली यूनिवर्सिटी में आज चुनावी घमासान
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव यानी DUSU के लिए आज मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। छात्र संघ के चार प्रमुख पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। मतदान दो पालियों में संपन्न कराया जा रहा है और इसके परिणाम कल यानी 19 सितंबर को घोषित किए जाएंगे। हालांकि, इस चुनाव की गहमागहमी के बीच नॉर्थ कैंपस में हुई हिंसा की घटनाओं ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इन हिंसक झड़पों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आज दोपहर 12 बजे हाई कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होगी, जिसे देखते हुए चुनाव के नतीजों पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
हिंसा की छाया में हो रहा मतदान
चुनाव की प्रक्रिया के ठीक पहले बीते दो दिनों से दिल्ली यूनिवर्सिटी का कैंपस मारपीट, तोड़फोड़ और छात्र संगठनों के बीच हुई झड़पों का गवाह बना है। चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा की कम से कम चार बड़ी घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिसमें कई विद्यार्थी घायल हुए हैं। इन घटनाओं को लेकर छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ABVP ने हिंसा के लिए NSUI और समाजवादी छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि NSUI ने इसका ठीकरा ABVP के कार्यकर्ताओं पर फोड़ा है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच आज छात्र मतदान केंद्रों पर अपना वोट डालने के लिए पहुंच रहे हैं और पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
विश्वविद्यालय के कॉलेजों में मतदान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आंकड़ों के अनुसार, कुल 4 बूथों पर 4,446 छात्र अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कैंपस में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की भारी तैनाती की गई है। नॉर्थ कैंपस से लेकर साउथ कैंपस तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा, छात्रों के लिए मतदान केंद्रों पर पीने के पानी, मेडिकल स्टाफ और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया कराई गई हैं। मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
हाई कोर्ट की सख्त चेतावनी
दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा पर गुरुवार को बेहद कड़ा रुख अपनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि लोकतंत्र को आपराधिक समाज में तब्दील करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई से अदालत संतुष्ट नहीं होती है, तो वह वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा पर रोक लगाने जैसा बड़ा निर्णय ले सकता है। आज दोपहर होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि छात्र संघ चुनाव के परिणामों का भविष्य क्या होगा, इसलिए इस सुनवाई पर विश्वविद्यालय के छात्रों और राजनीतिज्ञों की विशेष नजरें टिकी हैं।
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