सोशल मीडिया पर वायरल दावों की सच्चाई
बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं मुख्य परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर एक चर्चा तेजी से चल रही थी कि कॉपियों का मूल्यांकन इंसानों के बजाय AI द्वारा किया गया है। अभ्यर्थियों के बीच इस खबर को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी, जिस पर अब आयोग ने पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट कर दी है।
आयोग का आधिकारिक बयान
बिहार लोक सेवा आयोग ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि मुख्य परीक्षा की कॉपियों की जांच किसी भी प्रकार के AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए नहीं की गई है। आयोग ने साफ किया है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अनुभवी प्रोफेसरों की देखरेख में ही संपन्न हुआ है।
OSM सिस्टम क्या है और यह कैसे काम करता है
आयोग ने जानकारी दी है कि कॉपियों की जांच के लिए ऑन स्क्रीन मॉर्किंग यानी OSM सिस्टम का उपयोग किया गया है। लोग इस तकनीक को AI से जोड़कर देख रहे थे, जबकि यह पूरी तरह से एक डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया है। इस सिस्टम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- इसमें कॉपियों को डिजिटल रूप में स्कैन करके स्क्रीन पर लाया जाता है।
- प्रोफेसर अपनी लॉग-इन आईडी के जरिए सिस्टम में प्रवेश करते हैं।
- मूल्यांकन करने वाले अनुभवी प्रोफेसर डिजिटल स्क्रीन पर ही अंकों को दर्ज करते हैं।
- यह प्रक्रिया मानवीय हस्तक्षेप के माध्यम से ही पूरी होती है, जिसमें केवल माध्यम डिजिटल होता है।
AI से भ्रम क्यों फैला
चूंकि OSM प्रक्रिया में डिजिटल स्क्रीन का उपयोग होता है, इसलिए कई लोगों ने इसे तकनीक के प्रभाव के चलते AI समझ लिया। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन के लिए मानवीय विवेक और विषय विशेषज्ञों की पूरी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसमें मशीन का कोई दखल नहीं है, केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पारदर्शिता और गति बढ़ाने के लिए किया गया है।
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